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परिवार को प्राथमिकता

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 12:11 AM IST

कांग्रेस पार्टी में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बहुप्रतीक्षित बैठक एक दिखावटी आयोजन साबित हुई जहां कुछ खास घटित नहीं हुआ। मरणासन्न जैसी स्थिति में पहुंच चुके इस प्रमुख राष्ट्रीय विपक्षी दल के लिए तत्काल जरूरी अहम संगठनात्मक बदलावों की घोषणा करने के बजाय सीडब्ल्यूसी की बैठक में एक बार फिर इस पुरानी पार्टी पर गांधी परिवार की श्रेष्ठता स्थापित की गई। बैठक में सोनिया गांधी की पूर्णकालिक अध्यक्ष की स्थिति (हालांकि वह 2019 से ही अंतरिम अध्यक्ष हैं) की पुष्टि की गई और संगठनात्मक चुनावों के लिए अगले वर्ष 21 अगस्त से 20 सितंबर की दीर्घकालिक तिथि तय की गई। सबसे उल्लेखनीय बात रही वफादार नेताओं की यह मांग कि राहुल गांधी अपनी मां की जगह अध्यक्ष पद संभालें। राहुल गांधी ने कहा कि वह इस पर विचार करेंगे। राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की शिकस्त के बाद अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। गांधी के पक्ष में इस अनधिकारिक विश्वास मत को उस समय अंजाम दिया गया जब उसके शासन वाले राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब में उथलपुथल मची हुई है और पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं ने जिन्हें जी 23 कहा जा रहा है, खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
दरअसल राहुल गांधी इस्तीफे के बाद भी अध्यक्ष बने रहे और 2014 के बाद पार्टी की यह दुर्गति उनके ही नेतृत्व में हुई है। लगातार दो चुनावों में कांग्रेस लोकसभा में इतने सांसद भी नहीं जुटा सकी ताकि उसे नेता प्रतिपक्ष का पद मिल सके। हालांकि पार्टी ने 2018 में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की लेकिन उसने कहीं ज्यादा राज्य गंवा दिए। 2019 के आम चुनाव में गांधी ने अमेठी जैसा अपना पारिवारिक गढ़ भी गंवा दिया (हालांकि वह केरल से चुनाव जीतने में कामयाब रहे) उसके बाद पार्टी खराब प्रबंधन के चलते दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में सत्ता गंवा चुकी है। पार्टी को मध्य प्रदेश में सत्ता गंवानी पड़ी क्योंकि राहुल गांधी मुख्यमंत्री कमल नाथ और अपने विश्वस्त नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच की अंदरूनी लड़ाई नहीं सुलझा सके। वह कर्नाटक मेंं स्पष्ट असंतुलन वाले गठबंधन का प्रबंधन भी नहीं कर सके और थोक में हुए इस्तीफों के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में वापस आ गई।
मई 2021 में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इससे उनकी अकुशलता पर बल पड़ा। इससे पहले अगस्त 2020 में कांग्रेस के 23 बड़े नेताओं ने सोनिया गांधी को लिखे एक असाधारण पत्र में मांग की थी कि पार्टी में आमूलचूल बदलाव किया जाए। इसके बाद सीडब्ल्यूसी में कुछ बदलाव नजर आए थे। पंजाब में आए संकट के बाद पार्टी के सबसे काबिल मुख्यमंत्रियों में से एक को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके बाद जी 23 नेताओं ने एक और पत्र लिखा और एक संवाददाता सम्मेलन भी किया और पार्टी के संचालन के मसले को स्पष्ट करने की मांग की। पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने चुटकी लेते हुए कहा कि वे जी 23 हैं, न कि जी हुजूर। इस बात ने यकीनन गुस्सा दिलाया होगा लेकिन सोनिया गांधी ने सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद जब यह कहा कि जी 23 को उनसे मीडिया के माध्यम से बात नहीं करनी चाहिए क्योंकि वह एक पूर्णकालिक अध्यक्ष हैं तो इससे यही बात रेखांकित हुई कि वह वरिष्ठ असंतुष्टों के लिए अनुपलब्ध हैं और अपने परिवार के बारे में अरुचिकर बातें नहीं सुनना चाहतीं। सीडब्ल्यूसी के निर्णय यथास्थिति को बरकरार रखने वाले हैं जबकि अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में अहम विधानसभा चुनाव होने हैं।

First Published : October 17, 2021 | 11:24 PM IST