facebookmetapixel
Advertisement
IPO Listing Today: Indo-MIM, Xtranet और Lohia Corp की आज होगी शेयर बाजार में एंट्री; जानें GMP क्या दे रहा है संकेतGold, Silver Price Today: फेड के फैसले के बाद सोना हुआ मज​बूत, चांदी के भाव गिरेबाजार में सब ठीक दिख रहा, लेकिन अंदर से बढ़ रहा खतरा! ब्रोकरेज ने दी डिफेंसिव शेयरों में निवेश की सलाहUS Fed Rate: अमेरिकी फेड का बड़ा फैसला! ब्याज दरें रहीं स्थिर, लेकिन महंगाई को लेकर सख्त रुख बरकरारOpening Bell: सेंसेक्स 100 अंक फिसला, निफ्टी 24,200 के नीचे; रियल्टी शेयरों में 1% की गिरावटRBI अगस्त में ब्याज दर बदलेगा या नहीं? जानें 72 अर्थशास्त्रियों के सर्वे में क्या निकलाअगस्त में किन सेक्टरों में बनेगा पैसा? Realty और Auto पर बुलिश, IT पर ब्रोकरेज ने क्यों किया सावधान?Crude Oil: तेल की कीमतों में फिर गिरावट, राहत की उम्मीद से सस्ता हुआ कच्चा तेलStocks To Watch Today: PNB, BHEL, NBCC समेत इन शेयरों पर रखें नजर, कई कंपनियों ने किए बड़े ऐलानविदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 889 अंक उछला, निफ्टी में 265 अंकों की बढ़त

Editorial: जीएसटी कटौती से मांग में उछाल: क्या बदलेगी आरबीआई की रणनीति?

Advertisement

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की इस सप्ताह बैठक त्योहारी मौसम में हो रही है।

Last Updated- September 28, 2025 | 10:21 PM IST
Reserve Bank of India

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की इस सप्ताह बैठक त्योहारी मौसम में हो रही है। ऑनलाइन लेनदेन पर नजर रखने वाली शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आने वाले हफ्तों में जब कंपनियां अपने मासिक और तिमाही आंकड़े जारी करेंगी तो तस्वीर और साफ हो जाएगी लेकिन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में संशोधन का असर लोगों की खरीदारियों पर पड़ने की संभावना है। जीएसटी प्रणाली में अब केवल दो मुख्य दरें रह गई हैं जिससे अधिकांश वस्तुओं पर कर कम हो गया है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि यह स्थिति चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) संबंधी एमपीसी के अनुमानों को किस हद तक प्रभावित करती है। यह अनुमान बढ़ाया जा सकता है क्योंकि पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में जीडीपी वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही जबकि एमपीसी का अनुमान इससे कम यानी 6.5 फीसदी था। एक नकारात्मक पहलू यह है कि अनुमानों में अमेरिकी शुल्क के प्रभाव भी शामिल करने होंगे। हालांकि, सच कहा जाए तो यह स्पष्ट नहीं है कि ऊंचे शुल्कों का दौर कब तक चलेगा। भारतीय वार्ताकार व्यापार की पारस्परिक रूप से स्वीकार्य शर्तों पर पहुंचने के लिए अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ काम कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, आर्थिक वृद्धि दर इस समय एमपीसी के लिए बड़ी चिंता का विषय नहीं होना चाहिए। मुद्रास्फीति के मोर्चे पर देखें तो एमपीसी ने अगस्त में अपनी पिछली बैठक में चालू वित्त वर्ष में दर औसतन 3.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था जिसे कुछ विश्लेषक अधिक बता रहे हैं। जीएसटी दरों में कमी के बाद निकट भविष्य में मुद्रास्फीति दर भी कम होने की संभावना है, हालांकि एमपीसी इस पर विचार करने या अनदेखा करने का विकल्प चुन सकती है। भले ही हाल के महीनों में मुद्रास्फीति अनुकूल स्तर पर रही हो लेकिन मौद्रिक नीति दूरदर्शी बनाए जाने की जरूरत है। इस संबंध में, एमपीसी की अगस्त की बैठक में चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही के लिए 4.4 फीसदी मुद्रास्फीति दर का अनुमान लगाया गया था, जो 2026-27 की पहली तिमाही के लिए बढ़कर 4.9 फीसदी हो गई।

अगर ये अनुमान बरकरार रहते हैं तो फिर नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश नहीं है। इस तरह, एमपीसी का निर्णय इन अवधियों और उनके बाद के अनुमानों से प्रभावित होगा। भविष्य में दर में कटौती की गुंजाइश तभी बनेगी जब अगले वित्त वर्ष के मुद्रास्फीति अनुमान 4 फीसदी के लक्ष्य से काफी नीचे चले जाएं। इस साल अच्छे मॉनसून (जिससे रबी की फसलों को भी मदद पहुंचेगा) के कारण खाद्य मुद्रास्फीति सहज रहने की संभावना है, जबकि मुख्य मुद्रास्फीति 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर रही है। कुछ विश्लेषकों ने आने वाली तिमाहियों में मुद्रास्फीति नरम रहने का अनुमान लगाया है लेकिन एमपीसी का निर्णय स्वयं इसके संशोधित अनुमानों पर निर्भर करेगा।

एमपीसी कम से कम दो अन्य पहलुओं पर भी विचार करेगी। पहला, मांग बढ़ाने के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। शुरू में आयकर राहत के माध्यम से और अब जीएसटी दरों में कमी के जरिये मांग बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं। क्या आरबीआई को दरें अपरिवर्तित रखनी चाहिए या नीतिगत दर में कटौती के साथ मांग का समर्थन करना चाहिए?

दूसरी बात, क्या मौजूदा स्तर पर ब्याज दर में कटौती वास्तव में मांग को ताकत देगी? उल्लेखनीय है कि नीतिगत दरों में कटौती का बाजार में ब्याज दरों में प्रसार सुचारू नहीं रहा है। 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 6 जून को नीतिगत दर में 50 आधार अंक की कटौती के बाद वास्तव में लगभग 25 आधार अंक बढ़ गई है। इस तरह, मौजूदा स्तर पर ब्याज दर में 25 आधार अंक की एक और कटौती से बहुत मदद नहीं मिलेगी। लिहाजा, मौजूदा वृहद आर्थिक हालात को देखते हुए एमपीसी के लिए यथास्थिति बनाए रखना और अगले कुछ महीनों के दौरान आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति और राजकोषीय स्थितियों पर नजर बनाए रखना ही उचित रहेगा।

Advertisement
First Published - September 28, 2025 | 10:21 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement