बजट से जुड़ी अपेक्षाएं कारोबारी सुगमता, भरोसे पर आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और आयकर प्रावधानों को अपराध मुक्त करने के इर्द-गिर्द घूमती हैं, ताकि भविष्योन्मुखी अर्थव्यवस्था तैयार की जा सके। आयकर अधिनियम, 2025 ने दशकों पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को नए सिरे से व्यवस्थित करने का प्रयास किया, लेकिन उसमें हितधारकों की अपेक्षा के अनुरूप ठोस नीतिगत बदलाव नहीं किए गए। यही वजह रही कि इसे लेकर संदेह का माहौल बना रहा।
सामान्य प्रतिक्रिया यह थी कि पुराने कानून को ही दोबारा पेश कर दिया गया है। वर्ष 2026-27 का बजट, सरकार की निश्चितता बनाए रखने की जरूरत और एक तर्कसंगत कर नीति सुनिश्चित करने में सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश करता है। इसमें कई उल्लेखनीय घोषणाएं की गईं जो बेहतर दिनों की शुरुआत का संकेत देती हैं।
वित्त मंत्री के भाषण से निकली एक अहम बात थी विवादों को कम करने की दिशा में निर्णायक बदलाव। उनके भाषण में जुर्मानों और अभियोजन को युक्तिसंगत करने के मुद्दे को चिह्नित किया गया। बजट में एक सामान्य आदेश के जरिये आकलन और जुर्माने की प्रक्रिया को एकीकृत करने की बात कही गई। अपील का नतीजा कुछ भी हो, प्रथम अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील की अवधि के दौरान कर दाता पर दंड के लिए कोई ब्याज लागू नहीं होगा। आकलन और दंडात्मक कार्रवाई का एकीकरण, अपील से पहले जमा को 20 फीसदी से कम करके 10 फीसदी करना, छोटे उल्लंघनों को अपराध मुक्त करना और अद्यतन रिटर्न के दायरे का विस्तार करना, ये सभी कदम एक पूर्व अनुमानित समाधान की दिशा में बदलाव का संकेत देते हैं।
बजट ने कम रिपोर्टिंग के कारण दंड और अभियोजन से मिलने वाली छूट को आय की गलत रिपोर्टिंग के मामलों तक विस्तारित कर दिया है। यद्यपि इसकी लागत अधिक है (संबंधित कर का 100 फीसदी निर्धारित किया गया), फिर भी यह व्यवसायों को उन मामलों में आपराधिक जोखिम से स्पष्ट रूप से बाहर निकलने का मार्ग प्रदान करता है, जो अस्पष्ट क्षेत्र में आते हैं। यह विशिष्ट नीतिगत सुधार कर अपराधों को अपराध मुक्त करने संबंधी नीति आयोग के दस्तावेज का प्रतिबिंब है।
वर्ष 2019 के कॉरपोरेट कर सुधार के आधार पर, जिसका उद्देश्य कराधान को सरल बनाना था, न्यूनतम वैकल्पिक कर में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव किया गया है ताकि रियायती कर व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ा जा सके। न्यूनतम वैकल्पिक कर क्रेडिट का समायोजन केवल उन्हीं कंपनियों के लिए उपलब्ध होगा जो नई व्यवस्था को अपनाएंगी, और यह उनकी कर देनदारी के एक-चौथाई तक सीमित होगा। इसके अतिरिक्त, न्यूनतम वैकल्पिक कर को 1 अप्रैल, 2026 से एक अंतिम कर में परिवर्तित करने का प्रस्ताव है, जिससे न्यूनतम वैकल्पिक कर क्रेडिट का आगे संचय समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही इसकी दर को 15 फीसदी से घटाकर 14 फीसदी किया जाएगा। इसका अर्थ होगा कि 2025 का कानून लागू होने के साथ ही एक स्वच्छ शुरुआत भी हो जाएगी।
सूचना-प्रौद्योगिकी सेवाओं के लिए एकीकृत सेफ हार्बर व्यवस्था, तीव्र अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते और वर्ष 2047 तक वैश्विक डेटा केंद्रों के लिए कर छूट के माध्यम से क्षेत्र-विशिष्ट निश्चितता भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को सूचना प्रौद्योगिकी और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बढ़ाती है, साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहित करती है। इन कर छूटों की प्रकृति पर स्पष्टीकरण पत्र, साथ ही डेटा केंद्रों में निवेश के संदर्भ में इस घोषणा के प्रभाव विश्लेषण को सरकार के 2027 के एजेंडा में शामिल किया जाना चाहिए।
गुजरात इंटरनैशनल फाइनैंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) के लिए 100 फीसदी कर अवकाश को अब 20 वर्षों तक बढ़ा दिया गया है। कर अवकाश समाप्त होने के बाद भी, इन इकाइयों की व्यावसायिक आय पर रियायती 15 फीसदी कर लगाया जाएगा (पहले कर दर 25 फीसदी से 38 फीसदी के बीच तय थी)। ये संशोधन 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे और कर वर्ष 2026-27 तथा उसके बाद के वर्षों पर लागू होंगे। ये बदलाव गिफ्ट सिटी को वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने के लिए बड़े, रणनीतिक प्रयास को दर्शाते हैं।
बजट उन अधिकार-क्षेत्र के विवादों को सुलझाने का प्रयास करता है जिन्हें अक्सर तकनीकी कहकर खारिज कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए अधिकार-क्षेत्र और फेसलेस आकलन के टकराव, प्रत्यक्ष पहचान संख्या से उत्पन्न दोष, और सर्वोच्च न्यायालय का विभाजित निर्णय। इसका उद्देश्य 1 अप्रैल, 2026 से नए अधिनियम को स्पष्ट आधार पर लागू करना है। 1961 के अधिनियम में प्रस्तावित समान संशोधनों को स्पष्टीकरण लायक कहा जा रहा है और उन्हें तथापि वाली भाषा के साथ पेश किया गया है, वहीं उनके पुरानी तारीख से इस्तेमाल का परीक्षण न्यायालयों में होगा। यद्यपि बजट एक सुधारात्मक अभ्यास रहा है, एक रोचक बहुपक्षीय मुद्दा ऐसा है जिस पर बजट ने स्पष्टता नहीं दी: भारत की पिलर टू के तहत वैश्विक न्यूनतम कर को अपनाने की योजना। चूंकि 60 देशों ने किसी न किसी रूप में पिलर टू को अपनाया है, भारतीय नीति-निर्माताओं के लिए यह चुनौती बनी रहेगी।
कुल मिलाकर, बजट की थीम इसे एक सुधारात्मक अभ्यास के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था के लिए ठोस लाभ देना है। ये उपाय कर नीति को विकास की स्थिरता और पूंजी निर्माण के साथ संरेखित करते हैं, जिससे भारत की स्थिति एक दीर्घकालिक निवेश केंद्र के रूप में मजबूत होती है। प्रत्यक्ष कर प्रस्ताव निश्चितता को मजबूत करके और अनुपालन की जटिलताओं को कम करके, भारत के व्यावसायिक वातावरण को सुदृढ़ करते हैं, क्योंकि देश 1 अप्रैल, 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 को लागू करने की तैयारी कर रहा है। वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि सरल आयकर नियम और प्रपत्र जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे। सरकार की ये पहल निवेशकों के लिए निश्चितता साबित होंगी, जबकि प्रशासक आयकर अधिनियम के तहत प्रावधानों को और सुधारने पर अपना ध्यान केंद्रित करते रहेंगे।
(लेखक बीएमआर लीगल में साझेदार हैं। ये उनके निजी विचार हैं)