सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) ने विगत दिनों अपनी आर्थिक पूर्वानुमान सेवा में जारी कंज्यूमर पिरामिड्स हाउसहोल्ड सर्वे (सीपीएचएस) से रोजगार के क्षेत्रवार आंकड़े जारी किए। ये आंकड़े मासिक और तिमाही आधार पर उपलब्ध कराए गए। हम तिमाही अनुमानों का इस्तेमाल करते हुए यह समझने का प्रयास करेंगे कि व्यापक क्षेत्रों और उद्योगों पर लॉकडाउन का क्या असर हुआ है।
कृषि क्षेत्र में 2016 से लेकर जून 2020 तिमाही के अंत तक रोजगार का आंकड़ा 14 करोड़ से 15 करोड़ के बीच रहा है। सन 2016 में ही सीपीएचएस ने रोजगार शृंखला की शुरुआत की थी। जून 2020 में समाप्त तिमाही लॉकडाउन की पहली तिमाही थी। यही वह तिमाही थी जब देश भर में लॉकडाउन के सबसे कड़े प्रावधान लागू किए गए थे। इस अवधि में कृषि क्षेत्र में रोजगार की कोई हानि नहीं हुई, बल्कि कृषि क्षेत्र के रोजगार पिछली तिमाही से भी बेहतर रहे और एक वर्ष पहले की समान अवधि की तुलना में भी बेहतर रहे।
सितंबर 2020 में समाप्त तिमाही में कृषि क्षेत्र के रोजगार 15.8 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ गए। जुलाई और अगस्त 2020 में 16 करोड़ का आंकड़ा पार करते हुए कृषि क्षेत्र के रोजगार उच्चतम स्तर पर रहे। सितंबर 2020 तिमाही में कृषि रोजगार ठीक एक वर्ष पहले वाली तिमाही की तुलना में 5.5 फीसदी अधिक रहे।
लॉकडाउन के दौरान कृषि रोजगार में इजाफा बताता है कि एक तो गैर कृषि क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम होने से लोगों ने उधर का रुख किया और दूसरा यह कि कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बेहतर रहे। कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की यह अतिरिक्त बढ़ोतरी बताती है कि सन 2020 में खरीफ सत्र में बुआई के रकबे में भी रिकॉर्ड इजाफा हुआ। खरीफ में बुआई रकबा 4.8 फीसदी बढ़ा।
दिसंबर 2020 में समाप्त तिमाही में कृषि क्षेत्र के रोजगार घटकर 1.54 करोड़ रह गए। जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 1.58 करोड़ था। इसके बावजूद यह स्तर पिछले वर्ष की दिसंबर तिमाही से 3.5 फीसदी बेहतर था।
देश के कुल रोजगारों में कृषि की हिस्सेदारी 36 फीसदी है। सन 2016 से 2019 तक यह जहां 36 फीसदी रही, वहीं 2020 में यह बढ़कर करीब 40 फीसदी हो गई। सेवा क्षेत्र भी कुल रोजगार में 36 फीसदी का हिस्सेदार है। परंतु इसकी हिस्सेदारी बढ़ रही है। सन 2016 के 33 फीसदी से बढ़कर 2018, 2019 और 2020 में यह 38 फीसदी जा पहुंची।
सेवा क्षेत्र में रोजगारशुदा लोगों की तादाद 2017 के 14 करोड़ से बढ़कर मार्च 2020 तिमाही तक 15.7 करोड़ हो गई। परंतु कृषि के उलट लॉकडाउन में इसमें कमी आई। जून 2020 तिमाही में रोजगार घटकर 1.28 करोड़ रह गया। तब से इसमें सुधार हुआ लेकिन केवल आंशिक। सितंबर 2020 तिमाही में इस क्षेत्र में 1.46 करोड़ लोग रोजगारशुदा थे जबकि दिसंबर 2020 में यह आंकड़ा सुधरकर 14.8 करोड़ हुआ। यह स्तर मार्च 2020 या एक वर्ष पहले की तुलना में अब भी कम है। सेवा क्षेत्र के रोजगार का स्तर 2018 की किसी भी तिमाही से भी कम है।
खुदरा कारोबार, पर्यटन और यात्रा, शिक्षा और व्यक्तिगत गैर पेशेवर सेवाओं में रोजगार को जून 2020 तिमाही में भारी झटका लगा। खुदरा कारोबार सबसे अधिक नुकसान में रहे और यहां एक करोड़ लोगों ने रोजगार गंवा दिए। पर्यटन और यात्रा क्षेत्र में 55 लाख लोगों ने रोजगार गंवाए जबकि शिक्षा क्षेत्र में 53 लाख रोजगार का नुकसान हुआ। व्यक्तिगत गैर पेशेवर सेवा क्षेत्र में 25 लाख लोगों को रोजगार की क्षति हुई।
दिसंबर 2020 तिमाही तक शिक्षा को छोड़कर इनमें से अधिकांश सेवा क्षेत्रों में रोजगार बहाल होने लगे थे। शिक्षा क्षेत्र में रोजगार का जाना लगातार जारी है। दिसंबर 2020 में समाप्त तिमाही तक 59 लाख रोजगार गए। शिक्षा उद्योग में सन 2016-17 में 1.3 से 1.4 करोड़ रोजगार थे। ये 2018 और 2019 में बढ़कर 1.5 करोड़ हो गए। हालांकि 2019 के अंत तक इस क्षेत्र में कमजोरी नजर आने लगी और मार्च 2020 तिमाही में रोजगार गिरकर 1.45 करोड़ रह गए। जून और सितंबर 2020 तिमाही में इनकी तादाद और घटी और ये 97 लाख रह गए। दिसंबर 2020 तिमाही में शिक्षा क्षेत्र के रोजगार 91 लाख रहे।
सेवा क्षेत्र के अन्य सभी हिस्सों में रोजगार में सुधार लगभग पूरा हो चुका है। यात्रा एवं पर्यटन क्षेत्र में 2019-20 में 1.94 करोड़ लोगों के पास रोजगार था। जून 2020 तिमाही में गंभीर लॉकडाउन के दौरान इस क्षेत्र में रोजगार 55 लाख तक घटे लेकिन दिसंबर 2020 तिमाही में यहां 2.07 करोड़ लोग रोजगारशुदा थे यानी 2019-20 की तुलना में 13 लाख अधिक लोगों के पास रोजगार था। अन्य सेवा क्षेत्रों में भी सुधार हुआ। यही वजह है कि जून 2020 तिमाही में जहां सेवा क्षेत्र में 2.35 करोड़ रोजगार की हानि हुई, वहीं सितंबर तिमाही में यह गिरावट केवल 83 लाख और दिसंबर 2020 तिमाही में महज 55 लाख रह गई।
इसके विपरीत विनिर्माण क्षेत्र में गंवाए गए रोजगार में सुधार की गति धीमी रही है। सन 2019-20 में विनिर्माण क्षेत्र में 4 करोड़ रोजगार थे। पहली तिमाही में यह तादाद घटकर 2.46 करोड़ रह गई यानी 1.5 करोड़ लोगों के रोजगार छिन गए। दूसरी तिमाही में आंकड़ा सुधरकर 2.71 करोड़ हुआ और दिसंबर तिमाही में 2.88 करोड़। हालांकि 1.14 करोड़ के साथ अभी भी गिरावट का स्तर बहुत ज्यादा है। इससे भी अहम बात यह है कि औषधि क्षेत्र को छोड़कर हर बड़े विनिर्माण उद्योग में 2020-21 की तिमाहियों में 2019-20 की तिमाहियों की तुलना में कम लोग रोजगारशुदा रहे।
वास्तविक अचल संपत्ति और विनिर्माण उद्योग में तो रोजगार के मामले में सौ प्रतिशत सुधार हो चुका है। सन 2019-20 में इस उद्योग में 6.1 करोड़ लोगों के पास रोजगार थे। जून 2020 तिमाही में यह आंकड़ा गिरकर 2.8 करोड़ हुआ लेकिन दिसंबर 2020 तिमाही तक इसमें 3.3 करोड़ का सुधार हुआ और यह पुरानी स्थिति में आ गया। उच्च श्रम उत्पादकता वाले क्षेत्रों मसलन विनिर्माण आदि क्षेत्रों से रोजगार कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों मसलन कृषि और विनिर्माण में स्थानांतरित हुए।