अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपको कंपनी की तरफ से घर, गाड़ी या दूसरी सहूलियतें मिलती हैं, तो यह खबर आपके काम की है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने ‘इनकम टैक्स रूल्स, 2026’ को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। ये नए नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो जाएंगे। इन नियमों का मकसद यह है कि कंपनी से मिलने वाली सुविधाओं की कीमत तय करना आसान और साफ हो जाए। अब आपकी सैलरी में सिर्फ खाते में आने वाला पैसा ही नहीं, बल्कि कंपनी से मिलने वाली बाकी सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी।
नए नियमों के तहत, कंपनी द्वारा दिए गए घर (Residential Accommodation) की वैल्यू इस बात पर तय होगी कि आप किस शहर में रह रहे हैं। इसके लिए साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया गया है।
अगर कंपनी ने घर खरीदने की बजाय किराए पर लेकर आपको दिया है, तो टैक्स उसी पर लगेगा जो कम हो, या तो असली किराया जो कंपनी दे रही है, या आपकी सैलरी का 10%। और अगर घर फर्नीचर के साथ मिलता है, तो फर्नीचर की कीमत का 10% हर साल इसमें जोड़ दिया जाएगा, या जितना उसका किराया है वो। सरकारी कर्मचारियों के मामले में यह हिसाब सरकार की तय की गई ‘लाइसेंस फीस’ से लगाया जाएगा।
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अगर आपको दफ्तर की तरफ से कार मिली हुई है, तो उसकी इंजन क्षमता (CC) के हिसाब से टैक्स का आकलन होगा।
अगर कंपनी आपको घर के काम के लिए माली, चौकीदार या सफाई कर्मचारी जैसी सुविधाएं देती है, तो इसे भी आपकी कमाई का हिस्सा माना जाएगा। इस पर टैक्स का हिसाब बहुत सीधा है: कंपनी इन कर्मचारियों को जो भी सैलरी दे रही है, वही आपकी ‘सुविधा की कीमत’ मानी जाएगी। हां, अगर आप अपनी तरफ से इस सुविधा के लिए कंपनी को कुछ पैसे देते हैं, तो उसे कुल खर्च में से घटा दिया जाएगा।
बिजली, पानी और गैस के कनेक्शन पर भी यही बात लागू होती है। अगर कंपनी बाहर की किसी एजेंसी (जैसे बिजली बोर्ड) को बिल चुका रही है, तो बिल की जितनी राशि होगी, उतनी ही आपकी इनकम में टैक्स के लिए जुड़ जाएगी। वहीं, अगर कंपनी अपने ही संसाधनों से (जैसे खुद के पावर प्लांट या वाटर पंप से) ये सुविधाएं दे रही है, तो टैक्स इस आधार पर लगेगा कि उन सुविधाओं को तैयार करने में प्रति यूनिट कितनी लागत (Manufacturing Cost) आई है।
नए नियमों में कुछ राहत की खबरें भी हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए अगर कंपनी खर्च उठाती है, तो प्रति बच्चा 3,000 रुपये प्रति माह तक की सुविधा टैक्स फ्री रहेगी। इससे ज्यादा खर्च होने पर उसकी तुलना इलाके के दूसरे स्कूलों की फीस से की जाएगी।
इसके अलावा, कॉरपोरेट गिफ्ट्स और वाउचर को लेकर भी स्थिति साफ कर दी गई है। साल भर में कुल 15,000 रुपये तक के गिफ्ट या वाउचर पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। खाने-पीने की बात करें, तो वर्किंग आवर्स के दौरान 200 रुपये प्रति मील तक के फूड वाउचर भी टैक्स के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
लोन की सुविधा लेने वालों के लिए नए नियम में कहा गया है कि अगर आपने कंपनी से 2 लाख रुपये तक का कर्ज लिया है या किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए पैसा लिया है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे ज्यादा के लोन पर ब्याज की गणना स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की उस साल की पहली तारीख की दरों के हिसाब से की जाएगी।