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लुढ़कता रुपया पहुंचा 83 के पार

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 1:31 PM IST

डॉलर के मुकाबले रुपये में नरमी का रुख बना हुआ है और आज यह लुढ़ककर पहली बार 83 के स्तर के पार बंद हुआ। डीलरों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप धीमा करने तथा तेल कंपनियों द्वारा डॉलर की भारी मांग की वजह से रुपये में गिरावट बढ़ी है। वैश्विक स्तर पर डॉलर के मजबूत होने और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से भी रुपये पर दबाव बढ़ा है।   
रुपया 0.8 फीसदी गिरकर 83.02 पर बंद हुआ। मंगलवार को रुपया 82.36 पर बंद हुआ था। इससे पहले रुपये का सबसे निचला बंद स्तर 82.36 था और कारोबार के दौरान इसने 82.72 के निचले स्तर को छुआ था। इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले रुपये में 10.5 फीसदी की नरमी आ चुकी है।
शिनहान बैंक के वाइस प्रेसिडेंट कुणाल सोधानी ने कहा, ‘कुछ तेल एवं गैस पीएसयू ने करीब 1 अरब डॉलर मूल्य के डॉलर की खरीद की है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से रुपया 82 से 82.40 के बीच कारोबार कर रहा था और बाजार में डॉलर की उपलब्धता भी कम है।’ डीलरों के अनुसार आरबीआई ने आज ज्यादा तत्परता नहीं दिखाई और 82.40 से 82.44 के स्तर पर डॉलर की बिकवाली की। पिछले छह दिन से आरबीआई रुपये को इस स्तर पर सहारा दे रहा था।
11 अक्टूबर से ही रुपया 82.03 से 82.43 के दायरे में कारोबार कर रहा है। रुपये के लिए वृहद आर्थिक बुनियाद कमजोर बनी हुई है और आरबीआई द्वारा बाजार में हस्तक्षेप नहीं करने से स्थानीय मुद्रा में तेज गिरावट आई। ट्रेडरों का कहना है कि रुपये के 82.50 के स्तर को पार करने से उन्हें लगातार तकनीकी नुकसान उठाना पड़ा है। इससे भी रुपये में गिरावट को बल मिला। सभी उभरते बाजारों की मुद्राओं की तुलना में रुपये का प्रदर्शन आज सबसे खराब रहा।
एचडीएफसी बैंक के कार्यकारी उपाध्यक्ष (ओवरसीज ट्रेजरी) भास्कर पांडा ने कहा, ‘82.40 के स्तर को लांघने के बाद रुपया सीधे 83 के स्तर को पार कर गया। लोगों ने सोचा था कि 82.40-82.44 के स्तर पर रुपये को समर्थन मिलेगा। इस स्तर को लांघने के बाद हर कोई डॉलर खरीदने में जुट गया।’ पांडा का मानना है कि निकट अवधि में रुपया 82.50 से 83.50 के दायरे में  रह सकता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी और चालू खाते का खाता बढ़ना रुपये के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि आरबीआई डॉलर की बिकवाली के जरिये मुद्रा बाजार में कम हस्तक्षेप करने की नीति अपना सकता है। फरवरी में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 100 अरब डॉलर की कमी आई है। एएनजेड बैंक में ट्रेडिंग प्रमुख नितिन अग्रवाल ने कहा, ‘तेल की मांग, आयात बढ़ने और चालू खाते का घाटा बढ़ने से डॉलर की मांग काफी ज्यादा है।’ इस साल अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने शेयर बाजार में 23.16 अरब डॉलर की बिकवाली की है। 

First Published : October 19, 2022 | 9:31 PM IST