देश की धातु व खनन कंपनियां मसलन जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील, हिंडाल्को और कोल इंडिया इक्विटी निवेशकों को कई साल की अच्छी तेजी में से एक के जरिए चौंकाना जारी रखे हुए है।
देश की 10 अग्रणी धातु व खनन कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण अप्रैल में करीब 11 फीसदी बढ़ चुका है जबकि बेंचमार्क सेंसेक्स में 2 फीसदी व निफ्टी-50 में इस अवधि में 1.3 फीसदी की गिरावट आई है।
मंगलवार को बीएसई मेटल इंडेक्स (जो 10 अग्रणी धातु व खनन कंपनियों के बाजार पूंजीकरण को ट्रैक करता है) 3.5 फीसदी ऊपर रहा जबकि बेंचमार्क सूचकांकों में 1.4 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
धातु व खनन क्षेत्र के शेयरों का इंडेक्स मेंं भारांक बढऩे से यह देखने को मिला है। निफ्टी-50 का हिस्सा रहे धातु व खनन क्षेत्र के चार शेयरों का भारांक अब 3.6 फीसदी हो गया है, जो दिसंबर 2020 के आखिर में 2.6 फीसदी था और पिछले साल जून में 2.2 फीसदी के रिकॉर्ड निचले स्तर पर था।
कोल इंडिया, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, हिंडाल्को, हिंदुस्तान जिंक और एनएमडीसी समेत देश के 10 अग्रणी धातु व खनन शेयरों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण कैलेंडर वर्ष 2021 की शुरुआत से अब तक 33 फीसदी बढ़ा है जबकि बीएसई-500 इंडेक्स में 7.7 फीसदी की तेजी दर्ज हुई है।
ये चीजें उद्योग की किस्मत में तीव्र सुधार का संकेत देता है, जो पिछले दशक के ज्यादातर समय में व्यापक बाजार के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन करता रहा है। जेएसडब्ल्यू स्टील व हिंडाल्को जैसे धातु शेयर अब अब तक के सर्वोच्च स्तर पर कारोबार कर रहे हैं जबकि टाटा स्टील का शेयर पिछले हफ्ते अहम पड़ाव के पार निकल गया। पिछले गुरुवार को टाटा स्टील का शेयर कारोबारी सत्र में 953 रुपये की ऊंचाई को छू गया था, जो 13 साल पहले 29 अक्टूबर 2007 के 954 रुपये के भाव से ज्यादा है, जब लीमन संकट के पूर्व बाजारों में तेजी आई थी।
ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि इन क्षेत्रोंं के लिए अच्छा समय निकट भविष्य मेंं बना रहेगा क्योंकि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति का अवरोध धातु व अयस्क की कीमतों को हवा दे रहा है। स्टील उत्पादकों के मामले में तेजी का मामला सबसे मजबूत है।
एडलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने धातु क्षेत्र पर अपनी रिपोर्ट में कहा है, देसी स्टील शेयरों ने पिछले पांच दिन में 20 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है। चीन में उत्पादन में कटौती और स्टील निर्यात में कमी की संभावना आदि अवधारणा और कीमतें मजबूत बना रहा है।
चीन की मांग का योगदान वैश्विक स्टील खपत में आधे से ज्यादा है और अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 का काफी कम असर पड़ा है। चीन के अधिकारी पुराने स्टील मिल बंद कर रहे हैं ताकि कार्बन उत्सर्जन कम हो, इस वजह से वैश्विक स्तर पर स्टील की आपूर्ति की किल्लत हो रही है।
इसके अलावा कोविड के कारण हुए लॉकडाउन से पिछले एक साल में अयस्क व धातु उत्पादक अर्थव्यवसस्था में खनन, उत्पादन और परिवहन प्रभावित हुआ है, जिससे आपूर्ति में अवरोध बढ़ा है।
इसके परिणास्वरूप हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतेंं चीन में 2021 में 28 फीसदी बढ़ी है और पिछले एक साल में दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। कई ट्रेडरों का अनुमान है कि एचआर स्टील की कीमतें मौजूदा 817 डॉलर के मुकाबले बढ़कर 1,000 डॉलर प्रति टन के पार निकल जाएगी।
गैर-लौह धातु मसलन एल्युमीनियम, तांबा और जस्ते की कीमतों का ट्रैक करने वाला लंदन मेटल एक्सचेंज का इंडेक्स अब तक 15 फीसदी चढ़ चुका है और पिछले 12 महीने में उसमें 67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
धातु की ज्यादा कीमतोंं से मार्च तिमाही में धातु कंपनियों के मुनाफे में तेज उछाल की उम्मीद है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि धातु व खनन कंपनियां वित्त वर्ष 21 की चौथी तिमाही में अब तक का सबसे अच्छा तिमाही नतीजा घषित करेंगी और यह आईटी सेवा कंपनियों से आगे होगी।