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मूल्यांकन, तेल में तेजी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक परेशान

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 7:43 PM IST

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर 2021 से करीब 19 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेचे हैं, क्योंकि बढ़ती तेल कीमतों और बाजारों के महंगे महंगे मूल्यांकन ने उन्हें चिंतित कर दिया है। जेफरीज द्वारा सिंगापुर और यूरोप के करीब 50 फंड हाउसों के साथ बातचीत के आधार पर तैयार की गई एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।  
जेफरीज के प्रबंध निदेशक महेश नंदुरकर ने अभिनव सिन्हा के साथ मिलकर लिखी रिपोर्ट में कहा है, ‘भारत की स्थिति तटस्थ/कुछ हद तक ओवरवेट स्तर पर है जिससे पिछले 3-6 महीनों में भारत पर उसके भारांक में 50-100 आधार अंक की कमी का पता चलता है। महंगा मूल्यांकन ऊंची तेल कीमतों के साथ साथ चिंता का विषय बना हुआ है।’
रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्रों में, संपत्ति, वाहन और बैंक सुर्खियों में रहे, जबकि बढ़ती खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर स्टैपल्स में भी दिलचस्पी बढ़ी।  
जेफरीज का कहना है कि परिसंपत्ति वर्ग के तौर पर, चीन के इक्विटी बाजारों में कमजोर रुझान से उभरते बाजारों का प्रदर्शन प्रभावित हुआ। जेफरीज का कहना है कि चीन में संभावित नीतिगत बदलाव से चाइनीज बाजारों में सुधार आएगा और ईएम फंडों में प्रवाह बढ़ेगा जो भारत के लिए भी अच्छी खबर होगी। दीर्घावधि सफलता के उदाहरण के तौर पर भारत की लोकप्रियता बढ़ रही है और कई वैश्विक फंड भारत में निवेश बढ़ाना चाहते हैं।
पिछले 6 महीनों में, बीएसई के सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 7-7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में बिकवाली की। आंकड़ों से पता चलता है कि वाहन, फार्मा, रियल्टी और खपत-आधारित शेयरों पर ज्यादा दबाव देखा गया और उनसे संबंधित सूचकांकों में इस अवधि के दौरान 5 से 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि संभावित आय कटौती निवेशकों के बीच मुख्य धारणा है, लेकिन समान स्थिति 6 क्षेत्रों -वाहन, स्टैपल्स, ड्यूरेबल्स, सीमेंट, फार्मा और उद्योगों में है, जिनका बाजार भारांक में करीब 35 प्रतिशत का योगदान है।
नंदुरकर और सिन्हा ने कहा, ‘कुल मिलाकर, हमें वित्त वर्ष 2023 की निफ्टी आय वृद्घि करीब 15 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है। कई निवेशक इसे लेकर लगातार चिंतित बने रहेंगे कि बढ़ती ब्याज दरों और संपत्ति बाजार में सुधार से, इक्विटी बाजारों में छोटे निवेशकों का प्रवाह घटेगा। आगामी एलआईसी आईपीओ से इक्विटी बाजारों से कुछ तरलता समाप्त हो सकती है और ग्रामीण भारत से कमजोर मांग रुझान का व्यापक आर्थिक वृद्घि पर प्रभाव पड़ेगा। हमें विश्वास है कि निर्माण गतिविधियों में संभावित तेजी से प्रेषण में सुधार आएगा, जिससे ग्रामीण मांग में मजबूती आएगी।’
जेफरीज की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘दिसंबर 2022 के लिए निफ्टी का हमारा लक्ष्य 17,500 का है जिससे मूल्यांकन चिंताओं की वजह से एकतरफा रुझान का पता चलता है।’

First Published : April 20, 2022 | 1:10 AM IST