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IPO, QIP और राइट्स इश्यू से जुटाई रकम पर सेबी की नजर, नियम होंगे सख्त

रकम के इस्तेमाल में देरी, इनकी जानकारी छुपाने और इनके बेजा इस्तेमाल को लेकर उठी चिंताओं के बीच सेबी यह कदम उठाने पर विचार कर रही है

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सुन्दर सेतुरामन   
Last Updated- February 10, 2026 | 10:46 PM IST

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) आरंभिक सार्वजनिक निर्गमों (आईपीओ), पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) और राइट्स इश्यू के माध्यम से कंपनियों द्वारा जुटाई गई रकम पर निगरानी से जुड़े नियम सख्त बनाने पर विचार कर रहा है। इन माध्यमों से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल में देरी, इनकी जानकारी छुपाने और इनके बेजा इस्तेमाल को लेकर उठी चिंताओं के बीच सेबी यह कदम उठाने पर विचार कर रही है। इस मामले से जुड़े लोगों ने इसकी जानकारी दी।

फिलहाल जुटाई गई रकम 100 करोड़ रुपये से अधिक होने पर कंपनियों को सेबी के पास पंजीकृत एक निगरानी एजेंसी (एमए) की सेवाएं लेनी पड़ती है। यह आम तौर पर क्रेडिट रेटिंग एजेंसी होती हैं। सेबी अब यह सीमा घटाकर 50 करोड़ रुपये करने या पूरी तरह हटाने पर विचार कर रहा है। इस कदम से सेबी का निगरानी का दायरा बढ़ जाएगा खासकर छोटे निर्गम भी इसकी जद में आ जाएंगे।

सूत्रों ने कहा कि इस मुद्दे पर सेबी की प्राथमिक बाजार सलाहकार समिति की पिछली महीने हुई बैठक में चर्चा हुई थी। सेबी को इस मामले पर उसकी प्रतिक्रिया जानने के लिए भेजे गए ई-मेल का समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया था।

यही नहीं, नियामक निगरानी रिपोर्टों से जुड़े खुलासा ढांचे में भी बदलाव करने पर विचार कर रहा है। मौजूदा ढांचे के तहत निगरानी एजेंसियां अपनी त्रैमासिक रिपोर्ट कंपनी को सौंपती हैं। इसके बाद कंपनियों को यह रिपोर्ट तिमाही समाप्त होने के 45 दिनों के भीतर स्टॉक एक्सचेंजों को सौंपनी होती है।

यह पूरा सिलसिला अक्सर बीच में ही अटक जाता है क्योंकि कंपनियां रिपोर्ट सौंपने में देरी करती हैं या इनकी जानकारी नहीं दे पाती हैं। इससे निवेशकों को धन के उपयोग पर सीमित जानकारी ही हासिल हो पाती है।

सूत्रों ने कहा कि कुछ मामलों में तो कंपनियां आंकड़े एवं दस्तावेज साझा करने या निगरानी एजेंसियों को भुगतान करने से भी पीछे हट जाती हैं जिससे निगरानी प्रक्रिया में खलल पैदा हो रही है।

इन खामियों को दुरुस्त करने के लिए सेबी के विशेषज्ञ समूह ने निगरानी एजेंसियों को रकम जुटाने वाली कंपनियों को दरकिनार करते हुए निर्धारित 45 दिन की अवधि के भीतर रिपोर्ट सीधे स्टॉक एक्सचेंजों को जमा करने की इजाजत देने का प्रस्ताव रखा है।

इस कदम का उद्देश्य समय पर खुलासा सुनिश्चित करना और सूचीबद्ध संस्थाओं द्वारा हस्तक्षेप की गुंजाइश कम करना है। इसके अलावा, नियामक उन कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर भी विचार कर रहा है जो निगरानी एजेंसियों के साथ सहयोग करने में विफल रहती हैं। मौजूदा ढांचे के तहत किसी सूचीबद्ध कंपनी पर निगरानी एजेंसियों के साथ सहयोग करने में आनाकानी करने पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि अगर ऐसा व्यवहार जारी रहता है तो सेबी आगे नियामकीय कार्रवाई शुरू कर सकता है।

एमए द्वारा तैयार रिपोर्ट में अमूमन निर्गम के घोषित उद्देश्यों के बजाय रकम के इस्तेमाल पर ध्यान दिया जाता है। कंपनी के निदेशकमंडल (बोर्ड) एवं वरिष्ठ प्रबंधन को निष्कर्षों पर औपचारिक टिप्पणियां करनी होती हैं और कंपनी की वेबसाइट और स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से खुलासे सार्वजनिक करना आवश्यक होता है। बाजार नियामक ने एसएमई आईपीओ के लिए प्रभावी रूप से निर्धारित सीमा पहले ही मार्च 2025 से घटाकर 50 करोड़ रुपये कर दी है।

हाल के आंकड़े बताते हैं कि बड़े निर्गम लाने वाली कंपनियों पर इसका असर मामूली हो सकता है। पिछले साल केवल तीन मुख्य आईपीओ में नए निर्गम का आकार 100 करोड़ रुपये से कम था। निवेश बैंकरों का कहना है कि कैलेंडर 2025 के दौरान दाखिल हुए 200 से अधिक आईपीओ में ऐसी कंपनियों की तादाद अधिक हो सकती है जो नए निर्गम से 100 करोड़ रुपये से कम जुटाना चाह रही थीं।

किसी आईपीओ में निर्गम के कुल आकार में नया निर्गम या ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) यानी पुराने शेयरों की बिक्री या दोनों शामिल हो सकते हैं। ओएफएस से जुटाई रकम बिकवाली करने वाले शेयरधारकों के पास जाती है मगर किसी नए निर्गम के माध्यम से जुटाई गई रकम कंपनी को मिलती है और इसका इस्तेमाल कारोबार विस्तार, ऋण चुकाने या कामकाजी पूंजी की जरूरत आदि पूरी करने में होता है।

वर्ष 2025 में 103 कंपनियों ने मेनबोर्ड आईपीओ के माध्यम से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाए जिनमें से 64,419 करोड़ रुपये (लगभग 37 फीसदी) नए निर्गमों से आए थे। छोटे व्यवसायों में नई पूंजी पर निर्भरता और भी अधिक थी। 2025 में 267 कंपनियों ने एसएमई आईपीओ के जरिये 11,455 करोड़ रुपये जुटाए जिसमें 10,413 करोड़ रुपये नए निर्गमों से आए थे।

First Published : February 10, 2026 | 10:21 PM IST