कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी ने बुधवार को मार्केट इंटरमीडिएटरीज के लिए लागू ‘फिट एंड प्रॉपर पर्सन’ फ्रेमवर्क में व्यापक बदलावों का प्रस्ताव रखा जिसका मकसद रेगुलुटेरी प्रोसेस में ज्यादा स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने एक कंसल्टेशन पेपर में मार्केट इंटरमीडिएटरीज रेगुलेशन्स, 2008 की अनुसूची-2 में संशोधन सुझाए हैं। ये प्रावधान मध्यस्थों, उनके प्रमुख प्रबंधन कार्मिकों (KMP) और नियंत्रण रखने वाले व्यक्तियों पर लागू होते हैं। मार्केट इंटरमीडिएटरीज की कैटेगरी में शेयर ब्रोकर, म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स और निवेश सलाहकार आते हैं।
इन प्रस्तावों के तहत सेबी ने सुनवाई के अधिकार को नियमों में स्पष्ट रूप से शामिल करने, अयोग्यता से जुड़े मामलों के दायरे को परिभाषित करने और आवेदकों के लिए नियामकीय अनिश्चितता कम करने की सिफारिश की है।
नियामक ने परिसमापन कार्यवाही शुरू होने मात्र को ही अयोग्यता मानने का संदर्भ हटाने का प्रस्ताव दिया है। इसके बजाय केवल अंतिम परिसमापन आदेश को ही ‘उपयुक्त और सक्षम व्यक्ति’ के आकलन के लिए मान्य माना जाएगा। हालांकि, सेबी की मौजूदा प्रक्रिया में सुनवाई का अवसर दिया जाता है लेकिन इसे नियमों में स्पष्ट रूप से दर्ज करने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि किसी भी तरह की प्रक्रियात्मक अस्पष्टता न रहे।
इसके लिए एक नया प्रावधान सुझाया गया है जिसमें किसी भी अयोग्यता से जुड़ी घटना की जानकारी सात दिन के भीतर सेबी को देना अनिवार्य होगा। साथ ही, बिना उचित सुनवाई के किसी व्यक्ति को ‘उपयुक्त और सक्षम’ नहीं ठहराया जा सकेगा।
Also Read: ट्रेड डील पर बोले PM मोदी: राष्ट्रहित में लिया गया ‘बड़ा फैसला’, देश के हर वर्ग को मिलेगा फायदा
सेबी के कंसल्टेशन पेपर के मुताबिक, कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद आवेदन पर विचार न किए जाने की अवधि को एक साल से घटाकर छह महीने करने का सुझाव भी दिया गया है। पेपर में ग्रुप संस्थाओं और सहयोगी इकाइयों से जुड़े प्रावधानों में भी स्पष्टता लाने का प्रस्ताव है। सेबी ने इन प्रस्तावों पर 25 फरवरी तक सार्वजनिक रूप से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
(PTI इनपुट के साथ)