आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के नेतृत्व में नवाचार, संरचनात्मक रूप से विकसित हो रहा चीन और भारत में चक्रीय सुधार, 2026 में उभरते बाजारों (ईएम) के भीतर निवेश के सर्वोत्तम मौके मुहैया करा सकते हैं। गोल्डमैन सैक्स ऐसेट मैनेजमेंट की रिपोर्ट में ये बातें कही गई है।
अनुकूल वित्तीय परिस्थितियां और आर्थिक सुधार आने वाली तिमाहियों में उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। गोल्डमैन सैक्स ऐसेट मैनेजमेंट में फंडामेंटल इक्विटी के सह-मुख्य निवेश अधिकारी और उभरते बाजारों की इक्विटी के प्रमुख बासाक यावुज ने सिमोना गंबरिनी और मिथरन सुधीर के साथ मिलकर लिखे एक नोट में कहा, तेल की कम कीमतों के कारण उभरते बाजारों में मुद्रास्फीति की दर में नरमी से तेल के शुद्ध आयातकों को लाभ होगा। इसके विपरीत, कीमती और सामान्य धातुओं विशेष रूप से सोने और तांबे की उच्च कीमतें खनन निर्यात पर ज्यादा निर्भर उभरते बाजारों के लिए सहायक होंगी।
निवेशक उभरते बाजारों के शेयरों को लेकर सतर्क हैं, जो एक साल आगे के पीई अनुपात के आधार पर अमेरिकी शेयरों की तुलना में करीब 40 फीसदी छूट पर कारोबार कर रहे हैं और यह मूल्यांकन अंतर के कम होने की संभावना का संकेत देता है।
2025 में उभरते बाजारों के शेयरों ने पिछले आठ वर्षों में सबसे मजबूत सालाना रिटर्न दिया, जिसमें एमएससीआई ईएम इंडेक्स ने अमेरिकी डॉलर के लिहाज से 34.4 फीसदी रिटर्न दिया। इस इंडेक्स ने अमेरिकी शेयरों सहित अधिकांश विकसित शेयर बाजारों से बेहतर प्रदर्शन किया।
विश्लेषकों का मानना है कि उभरते बाजारों की परिसंपत्तियां (जिनमें बॉन्ड शामिल हैं) 2026 में भी अपनी तेजी जारी रख सकती हैं। यह तेजी देशों की आर्थिक वृद्धि, ब्याज दरों में अपेक्षित नरमी, डॉलर की कमजोरी और कंपनियों के मूलभूत सिद्धांतों से प्रेरित होगी। गोल्डमैन सैक्स ऐसेट मैनेजमेंट को साल 2026 में मोटे तौर पर तीन बड़ी थीम नजर आ रही है।
ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि भारत (जो 2025 में उच्च मूल्यांकन और चक्रीय मंदी के कारण अन्य उभरते बाजारों से पीछे रह गया था) अब सुधार के लिए तैयार हो सकता है। फर्म को उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में भारत की कंपनियों की आय में 14 फीसदी की वृद्धि होगी, जो कोरिया और ताइवान को छोड़कर उभरते बाजारों के औसत 10 फीसदी से अधिक है। एमएससीआई इंडिया के मुनाफे में 2025 में 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
मूल्यांकन के लिहाज से व्यापक उभरते बाजारों के सूचकांक की तुलना में भारत के हालिया कमजोर प्रदर्शन ने समकक्षों पर इसके प्रीमियम को कम कर दिया है। इससे वित्तीय, उपभोक्ता विवेकाधीन और कमोडिटी क्षेत्र के कुछ हिस्सों सहित चुनिंदा क्षेत्रों में प्रवेश के अवसर मिल सकते हैं।
एआई के तीव्र विस्तार से उभरते बाजारों के अवसर (विशेष रूप से उत्तर एशिया में) को नया आकार दे रहे हैं। चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया की कंपनियां वैश्विक एआई आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिसमें सेमीकंडक्टर, मेमोरी चिप्स, इलेक्ट्रॉनिक घटक और डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
दक्षिण कोरियाई बाजार ने पिछले वर्ष अपनी 70 फीसदी से अधिक की बढ़त का लगभग आधा हिस्सा सेमीकंडक्टर शेयरों के प्रदर्शन से हासिल किया। ताइवान के शेयर बाजार में भी सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे और डेटा सर्वरों के निर्यात के कारण तेजी आई।
गोल्डमैन सैक्स ने बताया कि उच्च मूल्य वाले निर्यातों की ओर रुझान और घरेलू तकनीकी प्रगति के कारण चीनी शेयर बाजारों में 2025 में सुधार हुआ। टैरिफ दबावों के बावजूद देश ने अपने 5 फीसदी के वृद्धि लक्ष्य को हासिल कर लिया, जो विविध निर्यातों और वैश्विक उत्पादन के लगभग एक तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले विनिर्माण आधार से समर्थित था।
यह निर्यात रणनीति, देश की विनिर्माण क्षमता और दुर्लभ धातुओं की आपूर्ति में प्रभुत्व के साथ मिलकर भविष्य में संभावित व्यापार तनावों से उत्पन्न होने वाले नकारात्मक जोखिम को कम कर सकती है। इसके अलावा, चीन के शेयर बाजार अमेरिकी बाजारों की तुलना में आगे की आय के गुणक के लिहाज से काफी कम कीमत पर कारोबार कर रहे हैं जबकि विदेशी स्वामित्व का स्तर ऐतिहासिक औसत से नीचे है।