शेयर बाजार

एआई के डर से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली, फरवरी में एफपीआई ने आईटी सेक्टर से ₹10,956 करोड़ निकाले

एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार आईटी शेयरों के अलावा वैश्विक फंडों ने एफएमसीजी और हेल्थकेयर में भी करीब 1,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

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साई अरविंद   
Last Updated- February 20, 2026 | 9:11 AM IST

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर पैदा हुए खौफ के कारण दुनिया भर में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई। इसका असर भारत के सॉफ्टवेयर शेयरों पर भी आया और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने इन शेयरों से जुलाई 2025 की दूसरी छमाही के बाद की सबसे बड़ी निकासी की।

नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के मुताबिक एफपीआई ने फरवरी के पहले पखवाड़े में 10,956 करोड़ रुपये के आईटी शेयर बेचे। इस दौरान दलाल पथ पर कुल मिलाकर 29,709 करोड़ रुपये का निवेश आया। लेकिन आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई।

एक्सचेंजों में निफ्टी आईटी इंडेक्स फरवरी में अब तक 15 फीसदी गिर चुका है। इस तरह यह मार्च 2020 के बाद के अपने सबसे खराब मासिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा गिरावट 17.7 फीसदी की गिरावट कोफोर्ज के शेयरों में हुई। इसके बाद एलटीआईमाइंडट्री के शेयरों में 17 फीसदी और इन्फोसिस के शेयरों में 16.5 फीसदी की नरमी आई। बेंचमार्क निफ्टी-50 इस महीने अब तक 1.2 फीसदी बढ़ा है।

एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार आईटी शेयरों के अलावा वैश्विक फंडों ने एफएमसीजी और हेल्थकेयर में भी करीब 1,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। फरवरी के पहले पखवाड़े में वित्तीय सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं में सबसे अधिक निवेश आया। तकनीकी क्षेत्र के शेयरों में गिरावट निवेशकों के बीच एआई के संभावित प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण हुई है। साथ ही स्टार्टअप एंथ्रोपिक द्वारा नए एआई टूल के लॉन्च ने इस सेंटिमेंट पर और चोट पहुंचाई है।

स्वतंत्र बाजार विशेषज्ञ अजय बोडके ने कहा कि एआई से पारंपरिक आईटी सेवाओं के व्यापार मॉडल को गंभीर खतरे की चिंताओं के कारण इन शेयरों में बिकवाली हुई है। उन्होंने बताया कि इस डर के चलते मूल्यांकन में गिरावट आई है। विश्लेषकों ने अपने डिस्काउंटेड कैश फ्लो (डीसीएफ) मॉडल में अल्पकालिक आय वृद्धि अनुमानों और दीर्घकालिक टर्मिनल वृद्धि अनुमानों को कम कर दिया है जिससे पीई अनुपात में कमी आई है।

बोडके ने कहा कि इस क्षेत्र में निवेशकों की स्थिति अब काफी अंडरवेट हो गई है। उन्होंने कहा, जब सभी निवेशक अंडरवेट हों तो धारणा में मामूली बदलाव भी बाजार में तेजी ला सकता है। उन्होंने कहा कि स्थिरता या नकारात्मक भावना में नरमी का पहला संकेत मिलने पर पोर्टफोलियो में निवेश फिर से बढ़ाने की कोशिश हो सकती है जिससे बाजार में उछाल आ सकती है।

इक्विरस कैपिटल के सेक्टर प्रमुख (टेक ऐंड डिजिटल) संदीप गोगिया ने कहा, यह गिरावट प्रतिस्पर्धा की चिंताओं के कारण उपजे निराशावाद को दर्शाती है। इसमें भारतीय आईटी सेवा प्रदाताओं के लिए नए अवसरों की संभावनाओं को काफी हद तक नजरअंदाज किया गया है, जो ऐतिहासिक रूप से हर प्रमुख प्रौद्योगिकी विकास में एकीकरण करने वाले और सहायक के रूप में सफल रहे हैं।

जेपी मॉर्गन के हालिया नोट में कहा गया है कि बाजार का एक वर्ग इस बात को लेकर चिंतित है कि भारतीय आईटी कंपनियां वृद्धि लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रह सकती हैं क्योंकि एआई आधारित दक्षता के कारण ग्राहक अपने खर्च को नए सिरे से तय कर रहे हैं। निवेश के दृष्टिकोण से बोडके ने 12-15 महीने के लिहाज से चुनिंदा आईटी शेयरों में और निवेश करने की सिफारिश की, भले ही कीमतों में तत्काल वृद्धि न हो।

First Published : February 20, 2026 | 9:11 AM IST