Dollar vs Rupee: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में सोमवार (2 मार्च) को बड़ी गिरावट देखी गई। बाजार खुलते ही रुपया 27 पैसे की बड़ी गिरावट लेकर डॉलर के मुकाबले 91.25 पर पहुंच गया। यह रुपया का एक महीने का सबसे निचला स्तर है।
वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से रुपये पर दबाव बढ़ा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बाद वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने का रुख दिखा। अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशकों ने सुरक्षित माने जाने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख किया। इससे डॉलर मजबूत हुआ और रुपये और अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं पर इसका असर पड़ा।
शनिवार और रविवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए। इसके बाद रुपये पर दबाव बढ़ गया। इससे लंबे समय तक रीजनल संकट का खतरा बढ़ गया और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में कई जगहों पर मिसाइल हमले किए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने डेली मेल से कहा कि यह संघर्ष अगले चार हफ्तों तक चल सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि जब तक अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर लेता, तब तक हमले जारी रहेंगे।
तनाव बढ़ने से निवेशक सोने जैसी सुरक्षित एसेट की ओर बढ़े। तेल की कीमतें एक साल से ज्यादा के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। ईरान ने कहा कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही बंद कर दी है। यह तेल निर्यात का अहम रास्ता है, जहां से दुनिया की करीब पांचवां हिस्सा तेल खपत गुजरती है। इससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बता दें कि तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं। बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि अगर रुपया और कमजोर होता है तो भारतीय रिजर्व बैंक ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने के लिए कदम उठा सकता है। इस साल की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुकाबले 91.9875 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। जबकि एक साल पहले के मुकाबले यह लगभग 4 प्रतिशत कमजोर हुआ है।