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SEBI की एफऐंडओ उत्पादों पर सख्ती की तैयारी

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बाजार नियामक एफऐंडओ ट्रेडिंग से संबंधित जोखिम का आकलन करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा दिए गए सुझावों और प्रस्तावों पर विचार करेगा।

Last Updated- June 28, 2024 | 10:44 PM IST
SEBI

सेगमेंट से शेयरों और सूचकांकों को प्रतिबंधित करने की तैयारी कर रहा है।

बाजार नियामक एफऐंडओ ट्रेडिंग से संबंधित जोखिम का आकलन करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिभारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) डेरिवेटिव सेगमेंट में खुदरा कारोबारियों के नुकसान को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बीच तेजी से बढ़ रहे वायदा एवं विकल्प (F&O)ति द्वारा दिए गए सुझावों और प्रस्तावों पर विचार करेगा।

सेबी अध्यक्ष माधबी पुरी बुच ने गुरुवार को कहा कि नियामक को एक्सपायरी के दिन आखिरी घंटे में सौदों में तेजी के रुझान का पता चला है। जब बुच से यह पूछा गया कि क्या नियामक किसी भी डेरिवेटिव उत्पाद को हटाने के लिए तैयार होगा तो उन्होंने कहा कि ‘जो भी जरूरी होगा, किया जाएगा।’

बुच ने कहा, ‘हमारे पास कोई पूर्वधारणा नहीं है। यदि यही आवश्यक है (ऑप्शन उत्पाद को हटाना) और यह समिति का दृष्टिकोण है तथा हम इसके औचित्य और तर्क से सहमत भी हैं, तो ऐसा किया जाना चाहिए।’

जब उनसे पूछा गया कि क्या यह स्टॉक एक्सचेंजों और ब्रोकरों के व्यावसायिक हित के खिलाफ हो सकता है, तो उन्होंने कहा, ‘किसी भी विनियमित इकाई के लिए नियामकीय जोखिम हमेशा बना रहता है। यह एक वास्तविकता है और कारोबार का हिस्सा है। निवेशक भी इसे समझते हैं। यह सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों के लिए सच है।’

कुछ उद्योग प्रतिभागियों ने भी समान विचार पेश किए हैं। जीरोधा के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी नितिन कामत ने एक्स पर लिखा है, ‘नियामकीय जोखिम किसी भी विनियमित व्यवसाय के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। हम ऑप्शन ट्रेडिंग में चरम की अवधि के मध्य में हैं। हम इस कारोबार में वृद्धि के बड़े लाभार्थी रहे हैं, लेकिन हमेशा से जानते रहे हैं कि विनियमनों के कारण इसका आकार काफी कम हो सकता है, जिससे राजस्व प्रभावित हो सकता है और यही वजह है कि हमने कोई आगामी अनुमान कभी व्यक्त नहीं किया।’

उन्होंने कहा, ‘भविष्य में ब्रोकिंग उद्योग के लिए समय चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि लगभग हर किसी का बिजनेस मॉडल ऑप्शन से कमाई पर केंद्रित बना हुआ है।’

सेबी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इंडेक्स ऑप्शंस (प्रीमियम) में कारोबार 2018 में 4.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 140 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि इस अवधि के दौरान खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई है।

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First Published - June 28, 2024 | 10:09 PM IST

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