डॉलर के मुकाबले रुपया बुधवार को 82 के करीब पहुंच गया क्योंकि फेडरल रिजर्व के विभिन्न अधिकारियों की टिप्पणी बताती है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक का नीतिगत सख्ती का चक्र अभी लंबा रास्ता तय करेगा।
बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 0.4 फीसदी की कमजोरी के साथ 81.94 के नए निचले स्तर पर बंद हुआ। रुपया मंगलवार को 81.58 पर टिका था, लेकिन कारोबारी सत्र में यह 81.95 के स्तर को छू चुका था।
करेंसी ट्रेडरों ने कहा, अगर भारतीय रिजर्व बैंक ने कारोबारी सत्र के दूसरे हिस्से में हस्तक्षेप न किया होता तो रुपया कमजोर होकर 82 के पार निकल जाता। अनुमान है कि आरबीआई ने हाजिर बाजार में बुधवार को 1 अरब डॉलर से ज्यादा की बिकवाली की।
कोटक सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (करेंसी डेरिवेटिव व ब्याज दर डेरिवेटिव) ए. बनर्जी ने कहा, आरबीआई के भारी हस्तक्षेप से ही रुपया आज यहां है, अन्यथा यह 82.50 के पास पहुंच जाता। आज के हस्तक्षेप के तहत आरबीआई ने निश्चित तौर पर एक अरब डॉलर से ज्यादा लगाए होंगे। आगामी दिनों में उन्हें डॉलर के मुकाबले रुपया 81.30 से 82.50 के दायरे में दिख रहा है। इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले रुपया 9.3 फीसदी कमजोर हुआ है। 21 सितंबर के बाद से रुपये में गिरावट की रफ्तार तेज हुई है, जब फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी और ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र अनुमान से लंबा रहने का संकेत दिया था।
उस दिन से स्थानीय मुद्रा में डॉलर के मुकाबले 2.7 फीसदी की गिरावट आई है और 11 उभरते देशों की मुद्राओं के मुकाबले इसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा। डीलरों ने कहा, रुपये की कमजोरी और उसमें सुधार के संकेत न देखते हुए आयातक डॉलर खरीदने की ओर बढ़े, जिससे रुपये की गिरावट और गहरी हो गई।
मंगलवार को फेड के अधिकारियों की टिप्पणी से संकेत मिला था कि अमेरिका में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की दरकार है। अमेरिका में महंगाई के 40 साल के उच्चस्तर पर पहुंचने के साथ फेड मार्च 2022 से ब्याज दरों में 300 आधार अंकों का इजाफा कर चुका है, जो 2004-06 की दर बढ़ोतरी के चक्र के बाद सबसे ज्यादा है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 20 साल के उच्चस्तर पर पहुंच गया क्योंकि ऊंची दरों को देखते हुए ग्लोबल फंड दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में चले गए।
शिनहान बैंक के उपाध्यक्ष (ग्लोबल ट्रेडिंग सेंटर) कुणाल सोढानी ने कहा, एफओएमसी के हालिया संकेत, अमेरिका के अच्छे आंकड़े और फेड अधिकारियों की टिप्पणी को देखते हुए फेड दिसंबर 2022 तक ब्याज दरों में 125 आधार अंकों का और इजाफा कर सकता है, जो 10 साल वाली अमेरिकी ट्रेजरी की दर 4 फीसदी पहुंचने के तौर पर प्रतिबिंबित हो चुका है।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच कारोबारी सत्र में एफआईआई की निवेश निकासी करीब 2 अरब डॉलर रही है। आगामी दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 80.60 से 82.50 के दायरे में रह सकता है।