डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार तीसरे दिन नए निचले स्तर पर टिका, जिसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में सुधार और उभरते बाजारों से पूंजी की निकासी डॉलर की ओर जाना है। देसी मुद्रा बुधवार को डॉलर के मुकाबले 79.64 पर बंद हुई, जो एक दिन पहले 79.60 रुपये पर बंद हुई थी। कारोबार के दौरान रुपये ने डॉलर के मुकाबले अब तक के निचले स्तर 79.68 को छू लिया था।
मौजूदा हफ्ते में रुपये ने डॉलर के मुकाबले 0.5 फीसदी का नुकसान दर्ज किया और इस साल अब तक रुपये की गिरावट 6.7 फीसदी पर पहुंच गई है। इस कैलेंडर वर्ष में डॉलर इंडेक्स 13 फीसदी मजबूत हुआ है और यह बुधवार को 20 साल के उच्चस्तर पर रहा।
यूक्रेन में युद्ध और वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी को लेकर चिंता व फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती की योजना ने निवेशकों को सुरक्षित अमेरिकी डॉलर की ओर धकेला है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय परिसंपत्तियों से इस साल अब तक 30.4 अरब डॉलर निकाले हैं और ज्यादातर निकासी इक्विटी से हुई। यह जानकारी एनएसडीएल के आंकड़ों से मिली। साल 2008 में वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान विदेशी निवेशकों की शुद्ध बिकवाली पूरे साल में 9.3 अरब डॉलर रही थी। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, कच्चे तेल की कीमत में रिकवरी, मजबूत डॉलर इंडेक्स और विदेशी फंडों की तरफ से निकासी के कारण कमजोर देसी इक्विटी की कमजोरी का असर रुपये पर पड़ा, जब केंद्रीय बैंक व सरकार ने कई कदम उठाए।
कच्चे तेल की कीमतें बुधवार को बढ़ी, जो अप्रैल के बाद पहली बार पिछले कारोबारी सत्र में 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चली गई थी। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 0.7 फीसदी चढ़कर 100.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। रॉयटर्स ने यह जानकारी दी। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के व्यापार घाटा और महंगाई पर दबाव बढ़ा रहा है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था तेल के आयात पर काफी ज्चादा निर्भर है।