वित्त वर्ष 2021 की दूसरी छमाही के लिए घरेलू गैस की कीमतों में 25 फीसदी की कटौती घरेलू गैस उत्पादकों के लिए अच्छी खबर नहीं है। हालांकि वैश्विक बाजार में गैस की कीमतों में लगातार हो रही गिरावट के मद्देनजर उम्मीद की जा रही थी कि घरेलू गैस कीमतों को घटाकर 1.9 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) किया जा सकता है लेकिन सरकार ने 1 अक्टूबर 2020 से 31 मार्च 2021 की अवधि के लिए गैस की कीमत 1.75 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू करने की घोषणा की है।
सरकार हर छह महीने बाद गैस की कीमतों की समीक्षा करती है और वैश्विक बेंचमार्क (अमेरिका, यूरोप और जापान) से जुड़े फॉर्मूले के आधार पर घरेलू गैस कीमतों को निर्धारित करती है। घरेलू बाजार में गैस की कीमत वित्त वर्ष 2021 की पहली छमाही में 2.39 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू थी लेकिन उसमें लगातार तीसरी बार गिरावट आई है। साथ ही घरेलू बाजार में गैस की मौजूदा कीमत नई घरेलू गैस नीति 2014 के तहत सबसे कम है।
जहां तक उत्खनन कंपनियों का सवाल है तो वित्त वर्ष 2021 के दौरान वॉल्यूम के सपाट रहने की उम्मीद है। तेल एवं गैस कीमतों में नरमी के कारण प्राप्तियां कम होने से उनकी आय पर दबाव बढ़ेगा। घरेलू गैस की कीमतों में 1 अप्रैल 2020 के बाद 26 फीसदी की गिरावट पहले ही आ चुकी है। जून तिमाही में ओएनजीसी की गैस प्राप्तियां क्रमिक आधार पर 28 फीसदी घटकर 2.4 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू रह गई थीं।
मूडीज इन्वेस्टर सर्विसेज का कहना है कि प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगातार हो रही गिरावट से ओएनजीसी और ऑयल इंडिया की आय घटेगी और उसका क्रेडिट नकारात्मक होगा। वित्त वर्ष 2021 के लिए ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के समेकित एबिटा पर इसका प्रभाव 3.5 फीसदी से 8 फीसदी के दायरे में हो सकता है।
ऐसे में आश्चर्य की बात नहीं है कि ओएनजीसी ने सेंसेक्स शेयरों के बीच सबसे सबसे अधिक गिरावट दर्ज की है। गुरुवार को दिन भर के कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर लगभग 4 फीसदी फिसलने के बाद 0.2 फीसदी गिरावट के साथ बंद हुआ। ऑयल इंडिया के शेयर में 1.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि सेंसेक्स में 1.65 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
गैस कीमतों में कटौती सबसे अधिक प्रभाव ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी तेल उत्खनन कंपनियों पर पड़ेगा। ये कंपनियां कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण पहले से ही आय के मोर्चे पर दबाव से जूझ रही हैं। इतना ही नहीं, कठिन क्षेत्रों से उत्पादित गैस की कीमत को भी 27.6 फीसदी घटाकर 4.06 डॉलर कर दिया गया है जो पहले 5.61 डॉलर थी। इससे खोज एवं उत्खनन गतिविधियां हतोत्साहित हो सकती हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ये कीमतें गैस की हाजिर कीमतों से भी कम हैं जबकि उसमें अधिकतम उतार-चढ़ाव 5 डॉलर का हो सकता है। केयर रेटिंग्स ने कहा है कि गैस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के आधार पर उत्खनन कंपनियों के लिए उत्पादन लागत अलग-अलग हो सकती है। प्राकृतिक गैस की कीमतों में गिरावट के कारण उत्पादन लागत यदि प्राप्तियों से अधिक होगी तो कंपनियों का लाभ प्रभावित हो सकता है अथवा उन्हें नुकसान भी हो सकता है।
हालांकि यह खबर उत्खनन कंपनियों के लिए अच्छी नहीं है लेकिन इससे शहरी गैस वितरण कंपनियों (सीजीडी) और उर्वरक, बिजली, सिरैमिक्स आदि अंतिम उपयोगकताओं को फायदा होगा।
रेलटेल ने आईपीओ दस्तावेज जमा कराया
सार्वजनिक क्षेत्र की रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए पूंजी बाजार नियामक सेबी के पास दस्तावेज दाखिल किए हैं। कंपनी की योजना इससे 700 करोड़ रुपये जुटाने की है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक आईपीओ के तहत सरकार इस कंपनी में अपने 8.66 करोड़ शेयरों की बिक्री की पेशकश करेगी। आईपीओ के मर्चेंट बैंकर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आईपीओ से 700 करोड़ रुपये जुटाए जाने का अनुमान है। रेलटेल एक मिनी रत्न कंपनी है। यह देश की सबसे बड़ी दूरसंचार बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने वाली कंपनी है। कंपनी का अपना अलग संचार बुनियादी ढांचा है। उसका रेलवे लाइन के साथ-साथ बिछे ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पर विशेष अधिकार है। इस आईपीओ के लिए आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, आईडीबीआई कैपिटल, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड को मर्चेंट बैंकर बनाया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2018 रेलटेल में 25 फीसदी तक हिस्सेदारी बिक्री के फैसले को मंजूरी दी थी। भाषा