चूंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 10 वर्षीय बॉन्ड का संग्रह लगातार कर रहा है, इसलिए बाजार में प्रतिभूति की किल्लत कुछ विशेष चुनौतियों को बढ़ावा दे रही है। डीलरों का कहना है कि यह बहुत ज्यादा कारोबार वाली प्रतिभूति नहीं है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि 10 वर्षीय बॉन्ड लंबे समय तक अर्थव्यवस्था के लिए दर संकेतक नहीं है।
ज्यादातर 10-वर्षीय बॉन्ड अब आरबीआई के पास मौजूद है, और बॉन्ड बाजार के एक वर्ग का कहना है कि केंद्रीय बैंक को इस सेगमेंट में तरलता बढ़ानी चाहिए। यदि आरबीआई ज्यादा बॉन्ड जारी करता है तो ऐसा संभव हो सकता है, भले ही वह अपनी पारंपरिक निर्गम सीमा के नजदीक हो, या बाजार हस्तक्षेप प्रणालियों के जरिये बाजार में बॉन्डों की बिक्री करे। कुछ बॉन्ड डीलरों का कहना है कि यदि जरूरत हुई तो आरबीआई 10 वर्षीय बेंचमार्क की पेशकश में विलंब पर विचार कर सकता है।
5.85 प्रतिशत के साथ वर्ष 2030 की परिपक्वता वाला बॉन्ड तकनीकी तौर पर बेंचमार्क 10-वर्षीय नहीं है। इसे 1 दिसंबर, 2020 को जारी किया गया था और इसलिए तकनीकी तौर पर यह अब 9 वर्ष का है। लेकिन इसे बेंचमार्क के तौर पर समझा जाता है, क्योंकि नया 10-वर्षीय पत्र अब तक जारी नहीं किया गया है। हालांकि भले ही नया बेंचमार्क जारी किया जाए, लेकिन बॉन्ड में कारोबार योग्य बिक्री में समय लगेगा। संबद्घ बॉन्ड की बकाया बिक्री 1.05 लाख करोड़ रुपये की है। अक्सर जब सरकार किसी पत्र से महज 1.20 लाख करोड़ रुपये जुटाती है तो नए बॉन्ड को जारी किया जाता है।
इसलिए नया बेंचमार्क सामान्य व्यवसाय में अभी आना बाकी है। लेकिन बॉन्ड डीलर इसे लेकर आश्वस्त नहीं है कि इसे लाना अच्छा होगा या नहीं।
इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के सहायक निदेशक सौम्यजीत नियोगी ने कहा, ‘बाजार में 10 वर्ष के फ्लोटिंग स्टॉक को देखते मौजूदा बॉन्ड की आपूर्ति बढ़ाना जरूरी हो गया है। अन्यथा, बेंचमार्क में जी-सैप की पेशकश मुश्किल हो जाएगी और प्रतिफल ही राह प्रभावित होगी।’
बाजार में अभी ज्यादा कारोबार वाले बॉन्ड वर्ष 2035 में परिपक्व हो रहे हैं, जबकि 10 वर्षीय बॉन्ड बिक्री के संदर्भ में तीसरे पायदान पर है। बुधवार को सरकारी प्रतिभूति बाजार में 19,541 करोड़ रुपये के कारोबार में, 10 वर्षीय बॉन्डों से बिक्री महज 1,770 करोड़ रुपये की थी, जबकि पिछले साल पांच वर्षीय बेंचमार्क 5,045 करोड़ रुपये की बिक्री के साथ बाजार में सर्वाधिक कारोबार वाला बॉन्ड रहा।
नया बेंचमार्क 5-वर्षीय बॉन्ड 12 अप्रैल को जारी किया गया था, जो अब बाजार में 3,630 करोड़ रुपये की बिक्री के साथ दूसरा सबसे ज्यादा कारोबार वाला पत्र है।
10 वर्षीय सेगमेंट में सेकंडरी बाजार का कारोबार घटा है जिसकी मुख्य वजह यह है कि आरबीआई ने अब अपने स्वयं के बहीखातों में आधे से ज्यादा बॉन्ड बरकरार रखे हैं। इससे प्रतिफल नियंत्रित करने में मदद मिली है और वह 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल को 6 प्रतिशत या इससे नीचे लाने के लिए प्रयासरत रहेगा।
भले ही आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल को 6 प्रतिशत के आसपास बनाए रखना लक्ष्य नहीं था, बल्कि प्रतिफल को क्रमबद्घ बनाना था, लेकिन बॉन्ड डीलर इसे लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि क्या किसी खास बॉन्ड की तरलता को सीमित करने से उद्देश्य पूरा हो जाएगा।
आरबीआई ने विभिन्न ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) और सरकारी प्रतिभूति खरीद कार्यक्रम (जी-सैप) के जरिये बॉन्ड एकत्रित किए हैं। (साथ में श्रीमी चौधरी)