पिछले महीने पहली बार गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) में शुद्ध निवेश ऐक्टिव इक्विटी म्युचुअल फंड योजनाओं द्वारा जुटाई गई रकम से ज्यादा हो गई। इससे निवेशकों की प्राथमिकताओं में एक बड़े बदलाव का संकेत मिलता है। सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज्यादा सुर्खियों में है।
जनवरी में गोल्ड ईटीएफ में 24,040 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। यह दिसंबर 2025 के 11,647 करोड़ रुपये के निवेश की तुलना में दोगुना है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़े बताते हैं कि सिल्वर ईटीएफ में और भी ज्यादा उछाल देखी गई। इसमें निवेशकों ने करीब 9,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा 3,962 करोड़ रुपये था।
पिछले महीने सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेश में यह उछाल आई। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें करीब 17 फीसदी बढ़ी जबकि महीने के आखिरी सत्र में भारी गिरावट के बावजूद चांदी की कीमतों में 39 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया में वरिष्ठ विश्लेषक नेहल मेश्राम ने कहा, यह उछाल दर्शाती है कि सोने की मांग असाधारण रूप से मजबूत बनी हुई है। इसे निवेशकों की सुरक्षित निवेश और विविधता लाने की प्राथमिकता का समर्थन मिला हुआ है। इस मजबूती का एक हिस्सा संभवतः वर्ष की शुरुआत में नए आवंटन को दर्शाता है क्योंकि निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों में अस्थिरता के दौर के बाद पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित करते हैं और जोखिम-मुक्त निवेश को बढ़ाते हैं। जहां निवेशकों ने कीमती धातुओं से जुड़े ईटीएफ में रिकॉर्ड निवेश किया, वहीं इक्विटी योजनाओं में निवेश में गिरावट देखी गई। जनवरी में शुद्ध निवेश 24,040 करोड़ रुपये रहा जो पिछले सात महीने में सबसे कम है।
मोतीलाल ओसवाल एएमसी के कार्यकारी निदेशक अखिल चतुर्वेदी ने कहा, इसमें आश्चर्य की बात नहीं जो जनवरी में सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाला कारक सोने और चांदी के ईटीएफ में निवेश रहा है। हाल के समय में निवेशकों को मिले अच्छे प्रतिफल को देखते हुए उन्होंने इक्विटी से आए अपने अतिरिक्त निवेश को कीमती धातुओं में लगाया है।
लगातार दूसरे महीने शुद्ध निवेश में गिरावट का मुख्य कारण निकासी में वृद्धि थी। निवेशकों ने पिछले महीने 41,639 करोड़ रुपये निकाले, जो पिछले 18 महीनों में सबसे ज्यादा है।
सकल निवेश प्रवाह में कुछ हद तक कमी आने के बावजूद सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के माध्यम से प्राप्त निवेश के कारण यह अभी भी मजबूत बना हुआ है। एसआईपी से मिला अधिकांश निवेश इक्विटी फंडों में आया। पिछले महीने इनमें 65,667 करोड़ रुपये का कुल निवेश आया, जो दिसंबर के मुकाबले 5 फीसदी कम है। एसआईपी के रास्ते आया निवेश अब तक के उच्चतम स्तर 31,002 करोड़ रुपये पर
बरकरार है।
हाइब्रिड फंडों में मल्टी-ऐसेट फंड में लगातार मजबूत निवेश आया। कीमती धातुओं में निवेश के कारण ये योजनाएं सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली डायवर्सिफाइड म्युचुअल फंड स्कीम साबित हुई हैं और पिछले महीने इनमें 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ।
एम्फी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकट चलसानी ने कहा, हाइब्रिड, मल्टी-ऐसेट और पैसिव योजनाओं में निवेश में वृद्धि, जिसमें सोने और चांदी के ईटीएफ में बढ़ा हुआ आवंटन शामिल है, निवेशकों के विविधीकरण करने और पोर्टफोलियो संतुलन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को बताता है। कुल मिलाकर, ये सब बाते दर्शाती हैं कि म्युचुअल फंड निवेश का व्यापक माध्यम बने हुए हैं और विभिन्न बाजार स्थितियों में भी इनमें सहभागिता का स्तर स्थिर बना हुआ है।