म्युचुअल फंड

घरेलू म्युचुअल फंड्स की शेयर खरीद तीन साल के निचले स्तर पर, गिरावट के बाद बढ़ सकती है खरीदारी

फरवरी में म्युचुअल फंडों की शुद्ध इक्विटी खरीद मासिक आधार पर 75 फीसदी घटी। बाजार में गिरावट के बाद नई खरीद की संभावना

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अभिषेक कुमार   
Last Updated- March 05, 2026 | 9:31 PM IST

भारतीय शेयरों में घरेलू म्युचुअल फंडों की खरीद बीती फरवरी में तीन साल के निचले स्तर 10,381 करोड़ रुपये पर आ गई। यह जनवरी के 42,355 करोड़ रुपये की तुलना में काफी कम है। गिरावट का कारण इक्विटी योजनाओं में घटता निवेश और बाजार में बढ़ता उतार-चढ़ाव है। लेकिन फंड मैनेजरों का मानना ​​है कि बाजार में हाल में आई तेज गिरावट से उन्हें आने वाले महीनों में खरीद बढ़ाने का मौका मिल सकता है क्योंकि शेयरों का मूल्यांकन ज्यादा आकर्षक हो गया है।

शेयरों में म्युचुअल फंडों के निवेश पर इक्विटी और हाइब्रिड योजनाओं में आने वाले शुद्ध निवेश, नकदी की स्थिति में बदलाव और हाइब्रिड फंडों के इक्विटी आवंटन में परिवर्तन का असर होता है। जनवरी में इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश सात महीने के निचले स्तर 24,029 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। बाजार के जानकारों का कहना ​​है कि इक्विटी योजनाओं के कमजोर अल्पकालिक प्रदर्शन के कारण निवेशकों का मनोबल सुस्त हुआ है। भू-राजनीतिक तनाव में इजाफे और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच गोल्ड ईटीएफ जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेशों की ओर निवेशकों का आवंटन बढ़ा है।

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में आने वाला निवेश 2025 के अधिकांश समय स्थिर बना रहा लेकिन इस महीने इसमें मामूली गिरावट देखी गई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का निवेश पिछले महीने सकारात्मक हो गया, जबकि पिछले दो महीनों से उनकी शुद्ध बिकवाली हो रही थी। इससे कुछ घरेलू फंड प्रबंधकों को मुनाफा कमाने का मौका मिला। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं के बीच कुछ फंडों ने आकर्षक भावों पर निवेश करने के लिए नकदी का अपना स्तर बढ़ाया।

क्वांट एमएफ ने अपने मार्च के इक्विटी आउटलुक में कहा, हमने हाल में निचले स्तर पर इक्विटी निवेश को फिर से मजबूत करने के मकसद से नकदी बढ़ाई है। उसने यह भी कहा कि घटते मूल्यांकन और वृद्धि की उम्मीदों से भारत एक आकर्षक बाजार बन रहा है। इसमें कहा गया है, हालिया सुधार और मजबूती के दौर में भारत के सापेक्ष पीई गुणक ऐतिहासिक औसत और व्यापक आर्थिक फंडामेंटल के अनुरूप हो गए हैं। हमारा मानना ​​है कि संरचनात्मक सुधारों के बाद आय संशोधन चक्र में सुधार से भारत के तेजी के अगले दौर को सहारा मिलेगा।

भारतीय शेयरों के भविष्य को लेकर ऐसेट मैनेजरों और ब्रोकरेज फर्मों के विचार बंटे हुए हैं। मॉर्गन स्टैनली के अनुसार हाल की अस्थिरता ने खरीदारी के अवसर पैदा किए हैं। ब्रोकरेज फर्म ने हाल में जारी एक नोट में कहा, भारतीय शेयर बाजार अच्छी खबरों की तुलना में बुरी खबरों पर ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जिससे यह संदेह पैदा हो रहा है कि भारत में संरचनात्मक समस्याएं उभर रही हैं। हमारा मानना ​​है कि इससे बाजार की प्रतिकूल स्थिति का पता चलता है और निकट भविष्य में अस्थिरता की संभावना के बावजूद उचित कीमतों पर ऊंची गुणवत्ता वाले शेयर खरीदने का मौका मिलता है।

लेकिन कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव का बाजार की धारणा पर दबाव जारी रह सकता है। अमेरिका-ईरान संघर्ष पर जारी रिपोर्ट में उसने कहा, जब तक यह मसला हल नहीं हो जाता, तब तक इस संघर्ष के कारण जोखिम से बचने की धारणा बनी रहेगी।

इसकी अवधि, तीव्रता और परिणाम ज्यादा अनिश्चित हैं और कच्चे तेल व गैस की ऊंची कीमतों के कारण भारत के आर्थिक माहौल पर और दबाव पड़ सकता है। भारतीय बाजार पहले से ही ऊंचे मूल्यांकन और आईटी सेवा क्षेत्र पर एआई के संभावित असर की चिंताओं से जूझ रहा है। निवेश आवक में कमी और नकदी भंडार में वृद्धि के कारण फंड प्रबंधकों की इक्विटी खरीदने की क्षमता सीमित हो गई है, लेकिन हाइब्रिड फंडों द्वारा इक्विटी आवंटन में वृद्धि से कुछ हद तक मदद मिल सकती है।

ताजा गिरावट के बाद मूल्यांकन में सुधार होने से अधिकांश बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (बीएएफ) और मल्टी-ऐसेट स्कीम इक्विटी में धीरे-धीरे अपना निवेश बढ़ा रही हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड ने बीएएफ पोर्टफोलियो का विश्लेषण किया है जिससे पता चलता है कि पांच अग्रणी योजनाओं का औसत इक्विटी आवंटन सितंबर 2024 के 46.4 फीसदी से बढ़कर जनवरी 2026 में 54.9 फीसदी पर पहुंच गया।

First Published : March 5, 2026 | 9:28 PM IST