अक्टूबर से दिसंबर तिमाही के दौरान दैनिक उपभोक्ता वस्तु (एफएमसीजी) बाजार में देश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के बीच का अंतर कम हो गया। बाजार अनुसंधानकर्ता एनआईक्यू ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। शोधकर्ता ने कहा, ‘हालांकि ग्रामीण बाजार ने लगातार आठवीं तिमाही में शहरी खपत को पीछे छोड़ दिया। लेकिन अक्टूबर-नवंबर और दिसंबर 2025 के दौरान इस वृद्धि का अंतर घट गया।’
रिपोर्ट में कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 2.9 प्रतिशत की मात्रात्मक वृद्धि दर्ज की गई, जो अधिक आधार के मुकाबले नरम रही। शहरी बाजारों में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसे ‘महानगरों की खपत में सुधार और ई-कॉमर्स की मांग के सामान्य से समर्थन मिला।
हालांकि बाजार की समूची वृद्धि दर त्योहार सीजन के अधिक आधार और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दर में कटौती के कारण 7.8 प्रतिशत तक नरम रही। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘दाम और मात्रा दोनों में तिमाही आधार पर नरमी आई, विशेष रूप से पारंपरिक व्यापार के तहत, जिसने कार्यान्वयन के शुरुआती चरण के दौरान अस्थायी आपूर्ति और मूल्य निर्धारण को दुरुस्त किए जाने का अनुभव किया।’
एफएमसीजी बाजार ने पिछली सितंबर तिमाही के दौरान 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी। भारत में नील्सनआईक्यू के प्रमुख (ग्राहक सफलता – एफएमसीजी तथा टेक और ड्यूरेबल) सारंग पंत ने कहा, ‘जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद उद्योग की गतिविधियों में तेजी देखी गई और विभिन्न श्रेणियों में मांग को प्रोत्साहन मिला।’
एफएमसीजी का लगभग 60 प्रतिशत पोर्टफोलियो दरों में संशोधन से प्रभावित रहा, जिसके लिए विभिन्न विनिर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के बीच समन्वित मूल्य निर्धारण समायोजन की आवश्यकता थी। हालांकि इन परिवर्तनों ने अस्थायी रूप से पारंपरिक व्यापार के प्रदर्शन को प्रभावित किया, लेकिन संगठित चैनल अधिक तेजी से इसके अनुकूल हो गए।
खान-पान और गृह एवं व्यक्तिगत देखभाल (एचपीसी) दोनों ही बास्केट में अक्टूबर से दिसंबर 2025 के दौरान मात्रात्मक वृद्धि में नरमी देखी। खान-पान की खपत को जीएसटी की बदौलत कीमत सुधारों और खाद्य तेल की कीमतों में स्थिरता से लाभ हुआ, जिससे इसे गृह एवं व्यक्तिगत देखभाल श्रेणी की खपत वृद्धि की तुलना में बेहतर प्रदर्शन में मदद मिली।
रिपोर्ट में कहा गया कि हालांकि तिमाही के दौरान खान-पान श्रेणी में 2.8 प्रतिशत की मात्रात्मक वृद्धि देखी गई, लेकिन एचपीसी ने 1.9 प्रतिशत की मात्रात्मक वृद्धि दर्ज की।