एशिया प्रशांत क्षेत्र में रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं (एफएमसीजी) के बाजार मूल्य में देसी कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़कर अब करीब 79 फीसदी हो गई है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।
बाजार अनुसंधान फर्म वर्ल्डपैनल बाय न्यूमरेटर (पूर्व में कैंटार) की रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब एक दशक पहले के 74 फीसदी से ऊपर उठने से संकेत मिलता है कि स्थानीय कंपनियां अब महज पारंपरिक विनिर्माता ही नहीं रह गई हैं, बल्कि वे एक डायनेमिक एवं ब्रांड आधारित संगठन बन गई हैं।
‘मेड लोकल, प्लेड ग्लोबल’ शीर्षक के साथ इस रिपोर्ट में बिस्कुट बनाने वाली मुंबई की कंपनी पारले का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पारले अपने बिस्कुट ब्रांड के लिए प्रसिद्ध है। उसका सबसे लोकप्रिय बिस्कुट ब्रांड है पारले-जी। इसे दुनिया में सबसे अधिक बिकने बाला बिस्कुट ब्रांड माना जाता है। कंपनी के ब्रांड भारत के सांस्कृतिक तानेबाने में गहराई से बुने हुए हैं जो पीढ़ियों से सभी आर्थिक एवं आयु वर्गों के उपभोक्ताओं के लिए विश्वास, उच्च गुणवत्ता और अच्छे मूल्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।’
रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी का व्यापक वितरण नेटवर्क उसे भारत के दूरदराज के गांवों के साथ-साथ दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पारले ने तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करते हुए अपने ब्रांड के उद्देश्य को स्पष्ट करने, आधुनिक उपभोक्ताओं की पसंद के अनुरूप खुद को ढालने और विशेष रूप से स्वास्थ्यवर्धक खानपान के रुझानों के साथ खुद को जोड़ने को प्राथमिकता दी है।’
गुणवत्ता, उद्देश्य और दीर्घकालिक ब्रांड निर्माण पर इस तरह ध्यान केंद्रित करने से उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ता है और उनके साथ एक मजबूत भावनात्मक संबंध बनाने में मदद मिलती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘उसने न केवल अपने घरेलू बाजार में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक ब्रांड के तौर पर अपनी राष्ट्रीय पहचान और गौरव पर ध्यान केंद्रित किया है। पारले-जी को भारत का अपना बिस्कुट कहा गया है लेकिन इस ब्रांड को अफ्रीका में भी स्थानीय पहचान दी गई है। अफ्रीका के अधिकतर देशों में पारले-जी शीर्ष तीन बिस्कुट ब्रांडों में शामिल है।’
केवल पारले ही नहीं बल्कि चीन के व्यक्तिगत स्वच्छता उत्पाद बनाने वाली हेंगान जैसे कई एशियाई ब्रांड अब अपनी ताकत को वृद्धि में तब्दील कर रहे हैं। ये ब्रांड क्षेत्रीय एवं वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपने देसी बाजार से आगे निकल रहे हैं।
वर्ल्डपैनल बाय न्यूमरेटर के प्रबंध निदेशक (दक्षिण एशिया) के. रामकृष्णन ने कहा, ‘एशियाई ब्रांडों में प्रतिस्पर्धा करने के लिहाज से एक महत्त्वपूर्ण बदलाव आया है। वे बाजार में हो रहे बदलावों पर ध्यान देने के बजाय डेटा, उपभोक्ताओं की समझ और बेहतर संगठनात्मक क्षमताओं का लाभ उठाकर मांग का अनुमान लगाने और तेजी से सटीक कार्य कर रहे हैं।’