देश में यात्री वाहनों की बिक्री की वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 में पिछले साल के मुकाबले नरम होकर 3 से 5 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। अधिक आधार और पहले से तय प्रतिस्थापन मांग की वजह से ऐसा हो सकता है, भले ही समूचा वाहन उद्योग अपना घरेलू बिक्री का वृद्धि चक्र जारी रखे। इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च ने गुरुवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा) के गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 26 के पहले 11 महीनों के दौरान यात्री वाहनों की बिक्री की वृद्धि दर 11.82 प्रतिशत रही। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से फरवरी तक अवधि में लगभग 42.5 लाख यात्री वाहन बेचे गए। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 38 लाख वाहन बेचे गए थे।
इंडिया रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि यात्री वाहन श्रेणी में वृद्धि दर दमदार इजाफे के बाद स्थिर होने के आसार हैं। हालांकि इसमें यूटिलिटी वाहन छोटी कारों और वैन की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते रहेंगे। हाल के वर्षों में मांग पुरानी गाड़ी बदलने और स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती पसंद से आई है, जिसके परिणामस्वरूप उद्योग के लिए ऊंचा आधार तैयार हो गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोपहिया वाहन श्रेणी के महत्त्वपूर्ण स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है और वित्त वर्ष 26 में घरेलू बिक्री वैश्विक महामारी से पहले का अधिक स्तर हासिल कर लेगी। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि महामारी से संबंधित कई वर्षों के व्यवधानों और कमजोर ग्रामीण मांग के बाद यह श्रेणी उद्योग की बिक्री में सुधार की प्रमुख चालक बन रही है।
देश में दोपहिया वाहनों की बिक्री के मामले में महामारी से पहले का शीर्ष स्तर वित्त वर्ष 19 था, जब घरेलू बिक्री लगभग 2.118 करोड़ वाहनों तक पहुंच गई थी। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 11 महीने के दौरान दोपहिया विनिर्माताओं ने लगभग 1.946 करोड़ वाहन बेचे और सालाना आधार पर 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसका मतलब है कि दोपहिया उद्योग की बिक्री वित्त वर्ष 26 में ही महामारी से पहले वाले शीर्ष स्तर को पार कर जाएगी।