facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

निवेशक क्यों भाग रहे हैं लंबी अवधि के डेट फंड से? फरवरी के आंकड़ों ने दिया संकेत

Advertisement

फरवरी में डेट म्युचुअल फंड में 42,106 करोड़ रुपये का निवेश आया, लेकिन जनवरी की तुलना में रफ्तार धीमी रही

Last Updated- March 11, 2026 | 3:14 PM IST
Debt MF outlook: Divide portfolio between long- and low-duration funds

फरवरी 2026 में डेट म्युचुअल फंड में निवेश जारी रहा, लेकिन जनवरी की तुलना में इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई। उद्योग संगठन AMFI के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में डेट म्युचुअल फंड स्कीम में कुल 42,106 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। जनवरी में यह आंकड़ा 74,827 करोड़ रुपये था।

विश्लेषकों का कहना है कि साल की शुरुआत में कंपनियों और संस्थागत निवेशकों ने अपने ट्रेजरी फंड का बड़ा हिस्सा म्युचुअल फंड में लगाया था। फरवरी में यह प्रक्रिया कुछ धीमी पड़ गई, इसलिए निवेश की रफ्तार कम दिखी। हालांकि सिस्टम में तरलता अभी भी मजबूत बनी हुई है।

लिक्विड फंड में सबसे ज्यादा निवेश

फरवरी में डेट म्युचुअल फंड की अलग-अलग श्रेणियों में लिक्विड फंड में सबसे ज्यादा निवेश आया। इन फंडों में करीब 59,077 करोड़ रुपये डाले गए। लिक्विड फंड ऐसे फंड होते हैं जो बहुत कम समय के लिए डेट वाले साधनों में निवेश करते हैं। कंपनियां और बड़े संस्थागत निवेशक इन्हें आमतौर पर थोड़े समय के लिए पैसा रखने और नकदी संभालने के लिए इस्तेमाल करते हैं। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के वरिष्ठ विश्लेषक नेहल मेश्रेम के अनुसार, इससे पता चलता है कि निवेशक फिलहाल कम जोखिम वाले और कम समय के निवेश को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

Also Read: IT Stocks पर नुवामा को बड़ा भरोसा, टॉप 10 शेयरों पर 84% तक अपसाइड टारगेट; कहा- AI चुनौती से उबर जाएगा सेक्टर

मनी मार्केट और लो-ड्यूरेशन फंड में भी मांग

लिक्विड फंड के बाद मनी मार्केट फंड में 6,267 करोड़ रुपये का निवेश आया। वहीं लो-ड्यूरेशन फंड में 2,329 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। इन फंडों में निवेश करने पर आम तौर पर स्थिर रिटर्न मिलता है और ब्याज दर के बदलने का जोखिम भी कम रहता है। हालांकि हर श्रेणी में निवेश नहीं बढ़ा। ओवरनाइट फंड से करीब 14,006 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। माना जा रहा है कि कुछ निवेशकों ने यहां से पैसा निकालकर लिक्विड फंड में लगा दिया, जहां थोड़ी बेहतर कमाई की उम्मीद रहती है। इसके अलावा अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड से भी करीब 4,374 करोड़ रुपये की निकासी हुई।

लंबी अवधि वाले फंड से दूरी

लंबी अवधि वाले डेट फंड में निवेशकों की दिलचस्पी अभी भी कम बनी हुई है। कॉरपोरेट बॉन्ड फंड से करीब 2,302 करोड़ रुपये निकाले गए। वहीं शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड से 1,917 करोड़ रुपये और बैंकिंग एवं पीएसयू फंड से 1,473 करोड़ रुपये की निकासी हुई।

इसके अलावा डायनेमिक बॉन्ड, मीडियम-टू-लॉन्ग ड्यूरेशन और लॉन्ग-ड्यूरेशन फंड से भी लगातार पैसा निकलता रहा।

निवेशक फिलहाल सतर्क

फरवरी के आंकड़ों से साफ है कि निवेशक अभी सावधानी से निवेश कर रहे हैं। वे ऐसे फंड चुन रहे हैं जहां पैसा सुरक्षित रहे, जोखिम कम हो और जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके।

दरअसल, दुनिया भर में ब्याज दरों, महंगाई और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। इसी वजह से निवेशक फिलहाल कम अवधि वाले डेट फंड में रहना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं और लंबी अवधि के फंड में बड़ा निवेश करने से पहले हालात साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।

Advertisement
First Published - March 11, 2026 | 3:14 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement