facebookmetapixel
Advertisement
Vedanta Demerger: वेदांत डीमर्जर का दूसरा दिन, कुछ शेयरों में हाहाकार तो कुछ में जबरदस्त खरीदारीFarm Loan Waiver: ₹75,000 तक का लोन पूरी तरह माफ, तमिलनाडु के 14.43 लाख किसानों को फायदाअब Credit Card का इस्तेमाल होगा महंगा! ब्याज, फ्यूल और ट्रैवल चार्ज में बड़ा बदलाव; चेक करें डीटेल्सआईटी दिग्गज Infosys के Q1 रिजल्ट की तारीख तय, जानिए कब आएंगे नतीजेयुद्ध हो या शांति समझौता, तेल बाजार में आगे क्या होगा? यह एक इंडिकेटर पहले ही बता देता हैNEET री-एग्जाम से पहले Telegram पर अस्थायी रोक, सरकार ने क्यों लिया फैसला?US में TCS की हार! ट्रेड सीक्रेट्स विवाद ने बढ़ाई टाटा कंपनी की मुश्किलें, अब चुकाने होंगे करोड़ों डॉलरTrade Deficit: निर्यात, तेल और अमेरिका से डील… FY27 में भारत की ट्रेड तस्वीर बदल सकते हैं ये 3 फैक्टरChina Shock 2.0: सोलर पैनल, EV से बैटरी तक, चीन की बढ़ती पकड़ ने यूरोप की नींद उड़ाई; G7 में बड़ा मुद्दाEV से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक… इन तेजी से बढ़ते सेक्टरों से बैंकों को मिल सकता है बड़ा फायदा

ऐंजल वन एमएफ का पैसिव खंड पर जोर

Advertisement

पैसिव क्षेत्र में कई कंपनियां सक्रियता के साथ काम कर रही हैं, लेकिन उसके पास विशिष्ट होने का अवसर है।

Last Updated- December 24, 2024 | 10:21 PM IST
AUM growth of mutual funds remained strong amid slowdown, raised Rs 68.6 lakh crore सुस्ती के बीच मजबूत रही म्युचुअल फंडों की AUM ग्रोथ, जुटाए 68.6 लाख करोड़ रुपये

तेजी से बढ़ते परिसंपत्ति प्रबंधन उद्योग में हाल में प्रवेश करने वाला ऐंजल वन म्युचुअल फंड सिर्फ पैसिव योजनाओं पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा। ऐंजल वन फंड का कहना है कि पैसिव क्षेत्र में कई कंपनियां सक्रियता के साथ काम कर रही हैं, लेकिन उसके पास विशिष्ट होने का अवसर है।

कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी हेमेन भाटिया के अनुसार यह फंड हाउस दूसरों की तरह सिर्फ सीधे वितरण तरीके पर ध्यान केंद्रित नहीं करेगा, बल्कि व्यक्तिगत वितरण चैनल का भी पूरा लाभ उठाएगा। डायरेक्ट प्लान ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्मों, पंजीकृत निवेश सलाहकारों (आरआईए) और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) की वेबसाइट के माध्यम से खरीदे जाते हैं। रेग्युलर प्लान डायरेक्ट प्लान की तुलना में महंगे होते हैं क्योंकि इनमें वितरक को कमीशन मिलता है और इन्हें ज्यादातर बैंक और व्यक्तिगत वितरक बेचते हैं।

अभी तक पैसिव फंड योजनाओं की बिक्री काफी हद तक डायरेक्ट माध्यमों तक सीमित है क्योंकि रेग्युलर प्लान के वितरक बेहतर कमीशन ढांचे के कारण ऐक्टिव फंडों को पसंद करते हैं। निप्पॉन इंडिया एएमसी में ईटीएफ प्रमुख रह चुके भाटिया का कहना है कि उद्योग ने पैसिव योजनाओं को बेचने के लिए रेग्युलन वितरण चौनल का प्रभावी तरीके से उपयोग नहीं किया है।

फंड हाउस ने निप्पॉन इंडिया एएमसी के दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी अपने साथ जोड़ा है। मेहुल दामा को मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) और समीर देसाई को मुख्य बिजनेस ऑफीसर (सीबीओ) के तौर पर शामिल किया गया है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई गुना बढ़े पैसिव फंड क्षेत्र को कोविड के बाद प्रतिस्पर्धी दबाव का सामना करना पड़ा है। 11 लाख करोड़ रुपये के बाजार सेगमेंट ने हाल के वर्षों में फंड प्रबंधन के शुल्क में बड़ी गिरावट देखी है।

उन्होंने कहा, ‘कीमतों पर प्रतिस्पर्धा करना हमारा प्राथमिक लक्ष्य नहीं है। हमारा लक्ष्य पैसिव निवेश के लाभ, निवेशकों के लिए इसका मूल्य और विविधीकृत पोर्टफोलियो में इसके महत्व को उजागर करना है।’ भाटिया के अनुसार घटता मार्जिन फंड हाउस के लिए बड़ी चिंता की बात नहीं है क्योंकि वे ऐक्टिव फंडों को बड़ी प्रतिस्पर्धा के रूप में देखते हैं। फंड हाउस ने अपने पहले फंड के तौर पर निफ्टी टोटल मार्केट इंडेक्स फंड को चुना है। फंड लॉन्च करने के लिए उसे नियामक से मंजूरी का इंतजार है।

Advertisement
First Published - December 24, 2024 | 10:12 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement