रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 200 अरब डॉलर के करीब पहुंच रहा है। कंपनी के शेयर में लगातार छठे दिन बढ़ोतरी दर्ज हुई और शुक्रवार को यह 4.4 फीसदी की उछाल के साथ 2,148 रुपये पर बंद हुआ। आंशिक चुकता शेयर करीब 9 फीसदी चढ़कर 1,285 रुपये पर पहुंच गया। आंशिक चुकता शेयरों की कीमत को जोड़ते हुए कुल बाजार पूंजीकरण अभी 14.16 लाख करोड़ डॉलर यानी 189.2 अरब डॉलर बैठता है। मुकेश अंबानी की अगुआई वाली फर्म 200 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण वाली पहली भारतीय कंपनी बनने से महज 5.4 फीसदी पीछे है।
अभी आरआईएल दुनिया की 46वीं सबसे मूल्यवान कंपनी है। कंपनी के बाजार पूंजीकरण ने अमेरिका की एक्सॉनमोबिल को पीछे छोड़ दिया है, जो कभी दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी थी। अभी ऊर्जा दिग्गज का बाजार पूंजीकरण 186 अरब डॉलर है।
पिछले छह कारोबारी सत्र में आरआईएल का शेयर 16 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। आरआईएल का शेयर मार्च के 868 रुपये के निचले स्तर से करीब 2.5 गुना उछला है।
इस शेयर की मजबूत चाल की वजह दूरसंचार और डिजिटल सेवा सहायक जियो प्लेटफॉर्म में लगातार हुआ निवेश है। साथ ही कंपनी के 53,124 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू की भारी मांग का भी इस पर असर पड़ा। दोनों पहल कंपनी को कर्ज मुक्त बनाने के लिए किए गए।
विश्लेषकों का मानना है कि आरआईएल में अभी और तेजी आनी बाकी है। बीएनपी पारिबा ने शुक्रवार को शेयर की लक्षित कीमत 43 फीसदी बढ़ाकर 2,317 रुपये कर दी। बीएनपी पारिबा ने एक नोट में कहा, हम आरआईएल में खरीद की सलाह को दोहराते हैं और लक्षित कीमत होगी 2,317 रुपये। जियो को मिली रकम से मूल्यांकन में बढ़ोतरी हुई है और जियो व खुदरा कारोबार के उच्च गुणक पर हमारी नजर है। हम आरआईएल का मूल्यांकन अब वित्त वर्ष 23 के अनुमान के आधार पर कर रहे हैं ताकि सभी कारोबार के बढ़त परिदृश्य पर बेहतर नजरिया बनाया जा सके। हालिया तेजी के बाद भी आरआईएल में अभी और जान बाकी है।
हिस्सेदारी बिक्री को लेकर आरआईएल की सऊदी अरामको संग बातचीत चल रही है। हालांकि मूल्यांकन को लेकर दोनों में मतभेद उभरे हैं। अप्रैल 2018 में आरआईएल ने बाजार पूंजीकरण के मामले में टीसीएस को पीछे छोड़ा था। पिछले दो साल में आरआईएल और टीसीएस का बाजार पूंजीकरण आगे-पीछे रहा है। हालांकि अब आरआईएल और टीसीएस के बाजार पूंजीकरण का अंतर 75 फीसदी हो गया है।