भारतीय बेंचमार्क एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी-50 में जून के आखिर से करीब 12-12 फीसदी की उछाल आई है और उसने खासे मार्जिन के साथ वैश्विक समकक्षों से उम्दा प्रदर्शन किया है। गुरुवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 75 आधार अंकों का इजाफा किया, जो इस साल की तीसरी बढ़ोतरी है। इस कदम ने बाजारों को चौंका दिया कि आगामी महीनों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी का अनुमान है।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी के साथ अब फेड की दर 3 से 3.25 फीसदी के दायरे में है और जनवरी 2008 के बाद का उच्चस्तर है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने साल 2022 के आखिर के लिए मीडियन एफएफआर दर 100 आधार अंक बढ़ाकर 4.4 फीसदी कर दी है, जो जून में 3.4 फीसदी थी। इससे संकेत मिलता है कि एफओएमसी की इस साल होने वाली अगली दो बैठकों में संचयी तौर पर 125 आधार अंकों की बढ़ोतरी होगी।
एचएसबीसी के शोध प्रमुख डी मेहर ने एक नोट में कहा है, नीतिगत दरों के लिए जोखिम अभी भी बढ़ोतरी का ही है क्योंकि महंगाई उच्चस्तर पर है। अब हम नवंबर में 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी, दिसंबर में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी और फरवरी 2023 में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं।
ऐसे में क्या बाजारों ने महंगाई में नरमी की संभावना का जश्न जल्दी मना लिया और क्या बाजार अब तकनीकी तौर पर ज्यादा खरीद वाले जोन में है। विश्लेषकों का मानना है कि फंडामेंटल के स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दर बढ़ोतरी व टिप्पणी अनुमान से ज्यादा आक्रामक है और यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अनुमान से ज्यादा तेजी से मंदी में धकेल सकता है।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक व मुख्य निवेश अधिकारी जी. चोकालिंगम ने कहा, मेरा मानना है कि मंदी आदि की वैश्विक परेशानी से निकट भविष्य में भारत को सस्ते तेल व व्यापार घाटे में नरमी के अलावा महंगाई के मोर्चे पर भी लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा, बाजारों में ज्यादा तेज गति से बढ़ोतरी नहीं हुई है और न ही यह जल्दी हुआ है। इसके बजाय यह सुदृढ़ रहा है क्योंकि भारत सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी रह सकती है। केंद्रीय बैंक के नीतिगत कदम से रिकवरी भी समान रूप से तेज होगी। सेंसेक्स व निफ्टी कैलेंडर वर्ष 2022 में नए सर्वोच्च स्तर को छू सकते हैं।
विश्लेषकों ने कहा, तकनीकी तौर पर भी एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स व निफ्टी-50 सर्वोच्च स्तर पर पहुंच सकते हैं। सेंसेक्स आगामी हफ्तों में 64,000 के स्तर तक जा सकता है और निफ्टी 19,000 का आंकड़ा छू सकता है। अहम यह है कि दोनों ही सूचकांकों ने रोजाना के चार्ट पर गोल्डन क्रॉस फॉर्मेशन देखा है। तकनीकी पैटर्न तेजी को प्रतिबिंबित करता है और हर गिरावट मध्यम से लंबी अवधि के लिहाज से खरीदारी के मौके के तौर पर देखा जा रहा है।
विश्लेषकों ने कहा, बीएसई सेंसेक्स व निफ्टी जब तक अच्छे वॉल्यूम के साथ 57,000 व 17,000 का स्तर नहीं तोड़ते (जो उनका 200 डीएमए का समर्थन स्तर भी है) तब तक तेजी का मामला बना रहेगा। अगर इंडेक्स की चाल थोड़ी नरम भी पड़ी तो भी कुल मिलाकर ट्रेंड तेजी के हक में ही बना रहेगा और अगर गिरावट आती है तो उसका इस्तेमाल खरीदारी के लिए किया जाना चाहिए।