Representative Image
वैश्विक निवेश कंपनी केकेआर और ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान (ओटीपीपी) के निवेश वाली इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) वर्टिस इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध इनविट में जाने की संभावना टटोल रही है। इस समय उसका ढांचा निजी तौर पर सूचीबद्धता वाला है। भारत के बुनियादी ढांचागत निवेश के परिदृश्य में घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, बेहतर तरलता और उभरते नियामकीय मानदंडों के बीच यह कदम उठाया जा रहा है। आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को लेकर उसकी शुरुआती बातचीत चल रही है।
वर्टिस इनविट के कार्यकारी निदेशक और संयुक्त मुख्य कार्य अधिकारी गौरव चांदना ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इनविट को निजी तौर पर सूचीबद्ध ढांचे से सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कराने पर आंतरिक विचार-विमर्श चल रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘हमें शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने में खासा फायदा दिख रहा है, लेकिन फिलहाल हम आकलन कर रहे हैं कि आगे बढ़ना है या नहीं और अगर ऐसा है, तो उचित समय सीमा क्या होनी चाहिए।’
चांदना ने कहा कि शेयर बाजार में सूचीबद्धता पर विचार का कारण खुदरा मांग से कम और घरेलू संस्थागत पूंजी की बढ़ती पैठ से ज्यादा है। यह बड़े निर्गमों के लिए अहम है क्योंकि इसके लिए ‘एंकर-जैसे’ निवेशकों की जरूरत होती है, जो 150 से 200 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता कर सकते हों। घरेलू संस्थानों, परिवार कार्यालयों तथा अधिक अमीर लोगों की मांग मजबूत हुई है, क्योंकि निवेशक इक्विटी बाजार की अस्थिरता के मुकाबले इनविट और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) को सुरक्षित मानते हैं, खास तौर पर हाल में इक्विटी के कमजोर प्रदर्शन, विदेशी पूंजी की निकासी और मुद्रा में गिरावट के कारण।
यह कदम ऐसे समय आया है जब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इनविट से जुड़े नियामकीय बदलाव किए हैं जिससे इनविट की कारोबारी गतिविधियों में तेजी आई है। सेबी ने निजी निवेश वाले इनविट के लिए कारोबारी लॉट का आकार घटाकर 25 लाख रुपये किया है और शेयर बाजारों पर बेहतर मूल्य की खोज के उपाय किए हैं।
चंदना ने कहा कि निजी तौर पर सूचीबद्ध इनविट की तरलता में खासी मजबूती आई है और वित्त वर्ष 26 में अब तक लगभग 8,000 करोड़ रुपये की सेकंडरी ट्रेडिंग हुई है। इसमें अकेले वर्टिस की लगभग एक-तिहाई हिस्सेदारी है और लगभग 2,800 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील शामिल हैं।
चंदना को उम्मीद है कि निजी इनविट में वार्षिक पूंजी प्रवाह अगले कुछ वर्षों में संभावित रूप से बढ़कर 25,000 से 50,000 करोड़ रुपये तक हो जाएगा, जिसके वर्तमान में 7,000 से 10,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार सार्वजनिक इनविट में कारोबार की मात्रा पिछले दो वर्षों के दौरान 128.23 प्रतिशत बढ़ चुकी है, जिससे आमदनी देने वाली परिसंपत्तियों में निवेशकों के बढ़ते विश्वास का पता चलता है। कारोबार की मात्रा वित्त वर्ष 23 में 27.35 करोड़ यूनिट थी जो वित्त वर्ष 25 में बढ़कर 62.42 करोड़ यूनिट हो गई। इसी अवधि में कारोबार का मूल्य 115.53 प्रतिशत बढ़कर 2,840 करोड़ रुपये की तुलना में 6,121 करोड़ रुपये हो गया, जबकि बाजार पूंजीकरण साल 2025 में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत बढ़कर 28,776 करोड़ रुपये हो गया।