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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति में संभावित बाधा की चिंताओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाएगा। इसमें राजनीतिक रिस्क इंश्योरेंस उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को नेवी की सुरक्षा देना भी शामिल हो सकता है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (DFC) को निर्देश दिया है कि वह खाड़ी से गुजरने वाले समुद्री व्यापार, खासकर ऊर्जा आपूर्ति के लिए राजनीतिक रिस्क इंश्योरेंस और गारंटी उपलब्ध कराए।
उन्होंने कहा, “तुरंत प्रभाव से मैंने डीएफसी को आदेश दिया है कि वह उचित कीमत पर समुद्री व्यापार की वित्तीय सुरक्षा के लिए राजनीतिक रिस्क इंश्योरेंस और गारंटी उपलब्ध कराए, खासकर खाड़ी से गुजरने वाली ऊर्जा आपूर्ति के लिए। यह सुविधा सभी शिपिंग कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी।”
ट्रंप ने आगे कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिकी नेवी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों को सुरक्षा प्रदान करना शुरू कर सकती है।
उन्होंने कहा, “जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना जल्द से जल्द होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों को एस्कॉर्ट करना शुरू करेगी। किसी भी स्थिति में अमेरिका दुनिया को ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। अमेरिका की आर्थिक और सैन्य ताकत दुनिया में सबसे बड़ी है। आगे और कदम उठाए जाएंगे।”
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब कच्चे तेल के बाजार क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य लगातार चौथे दिन भी प्रभावी रूप से बंद रहा। याहू फाइनेंस के आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 82.29 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण बढ़ती अस्थिरता को दर्शाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है और यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बनाए रखने के लिए आर्थिक और सैन्य दोनों उपायों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है।
यह बयान उस समय आया है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई शहरों में संयुक्त हवाई हमले किए थे। इन हमलों में सैन्य कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल ठिकाने और शासन से जुड़े अहम ढांचे को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और चार वरिष्ठ सैन्य व सुरक्षा अधिकारियों की मौत हो गई थी। तेहरान और अन्य बड़े शहरों में जोरदार धमाकों की खबरें आई थीं।
इसके जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से अमेरिका के ठिकानों और उसके सहयोगी देशों पर हमले किए। इन हमलों में इजराइल, बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन शामिल थे। इससे पश्चिम एशिया में संघर्ष और फैल गया और आम नागरिकों तथा प्रवासियों के लिए जोखिम बढ़ गया।