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तेल की तपिश से निवेशक परेशान

Last Updated- December 11, 2022 | 8:51 PM IST

तेल की कीमतों में लगातार तेजी से निवेशकों का हौसला पस्त हो रहा है। शेयर बाजार भारी उतार-चढ़ाव के बीच चार दिन बाद आज करीब एक फीसदी बढ़त पर बंद हुआ। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि तेल के बढ़ते दाम निकट अवधि में बाजार के लिए बड़ा अवरोधक बनेे रहेंगे।
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए क्रेडिट सुइस ने भारत के शेयर बाजार की रेटिंग ‘ओवरवेट’ से घटाकर ‘अंडरवेट’ कर दी है। विश्लेषकों का कहना है कि बाजार पर गुरुवार को आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों से कहीं ज्यादा असर तेल के दाम का पड़ेगा। चुनाव बाद सर्वेक्षण के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली भारतीय जनता पार्टी के पांच में से चार राज्यों में जीतने के आसार हैं। सामान्य परिस्थितियों में बाजार को ऐसे चुनावी नतीजों से खुश होता है क्योंकि इसे 2024 के आम चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपने एक नोट में कहा है, ‘वृहद आर्थिक चुनौतियां बाजार के लिए भाजपा की जीत की खुशी को कम कर सकती है। मेरी राय में ऊर्जा की ऊंची कीमतें और विभिन्न आर्थिक मानदंडों पर इसके प्रभाव से निकट अवधि में बाजार को दिशा मिलेगी।’ सोमवार को ब्रेंट क्रूड आज 140 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, जो 14 साल का उच्च स्तर है। लेकिन आज इसमें थोड़ी नरमी आई और यह 125 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा था। हालांकि तेल के साथ विभिन्न जिंसों के दाम भी कई साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं जिससे मुद्रास्फीति बढऩे का डर है।
क्रेडिट सुइस ने नोट में लिखा है, ‘हमने भारत में रणनीतिक रूप से अपनी पोजिशन को ओवरवेट से घटाकर अंडरवेट कर दिया है। तेल के ऊंचे दाम चालू खाते के घाटे को प्रभावित कर रहे हैं और मुद्रास्फीति पर भी दबाव बढ़ रहा है, जिससे फेड द्वारा ब्याज दरों में वृद्घि की संभावना भी बढ़ गई है।’ ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि मलेशिया जैसे बाजारों को जिंसों के दामों में तेजी का फायदा मिल सकता है।
बेंचमार्क सेंसेक्स अक्टूबर 2021 के उच्चतम स्तर से करीब 14 फीसदी टूट चुका है। इनमें से ज्यादा गिरावट रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद पिछले दो हफ्तों में आई है।

अमेरिका नहीं करेगा रूस से तेल का आयात
यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के जवाब में रूसी अर्थव्यवस्था पर शिकंजा कसने के मद्देनजर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन रूस से तेल के आयात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय किया किया है। मामले के जानकार एक सूत्र ने बताया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमिर जेलेंस्की द्वारा अमेरिका और पश्चिमी देशों से रूस से आयात बंद करने के आग्रह के बाद अमेरिका ने यह कदम उठाने का निर्णय किया है। अमेरिका और पश्चिमी देशों से सहित कई सहयोगी देशों ने भी रूस पर तमाम तरह की पाबंदियां लगाई हैं। रूस के चुनिंदा बैंकों को स्विफ्ट से भी बाहर कर दिया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान में रूस को समस्या आ सकती है। हालांकि अभी तक ऊर्जा के निर्यात पर पाबंदी नहीं लगाई गई थी और उसके भुगतान पर भी रोक नहीं थी। मामले के जानकार सूत्र ने बताया कि बाइडन देर रात इस बारे में घोषणा कर सकते हैं। व्हाइट हाउस ने कहा है कि बाइडन रूस को यूक्रेन पर हमले का जिम्मेदार मानते हैं और उस पर जल्द ही और सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।     एजेंसियां

First Published - March 8, 2022 | 11:08 PM IST

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