देश में निवेशकों की संख्या 5 करोड़ के पार निकल गई है। भारत के सबसे बड़े एक्सचेंज नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने सोमवार को यह जानकारी दी। देश में कुल डीमैट खाते के मुकाबले निवेशकों की संख्या 30 फीसदी कम है, इसकी वजह यह है कि कई निवेशकों के पास कई डीमैट खाते व ट्रेडिंग अकाउंट अलग-अलग ब्रोकरों के पास हैं। सितंबर के आखिर में सीडीएसएल और एनएसडीएल के पास कुल डीमैट खाते 7.02 करोड़ थे।
इस साल डीमैट खातों की संख्या 40 फीसदी यानी 2.04 करोड़ बढ़ी है, जिनमें से कई पहली बार निवेश करने वाले हैं। निवेशकों के खातों की संख्या में उछाल की वजह शेयर बाजार में तेजी, खाता खोलने में आसानी और कोविड-19 महामारी के बाद कामकाज में आया बदलाव है और लोग दूरदराज से काम कर रहे हैं। ब्रोकरों की तरफ से लाभकारी पेशकश मसलन शुल्क में छूट व गिफ्ट वाउचर्स भी नए क्लाइंटों को आकर्षित कर रहे हैं, जिसकी वजह से एक निवेशक के कई खाते देखने को मिलते हैं।
एनएसई ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, एनएसई में यूनिक पंजीकृत निवेशकों की संख्या 25 अक्टूबर को 5 करोड़ के पार निकल गई। हालांकि 3 करोड़ से 4 करोड़ की संख्या तक पहुंचने में करीब 15 महीने लगे, लेकिन अगले एक करोड़ निवेशक महज सात महीने में ही जुड़ गए। एक्सचेंज के पास पंजीकृत क्लाइंट कोड की कुल संख्या 8.86 करोड़ है।
किसी निवेशक के एक से ज्यादा डीमैट व ट्रेडिंग खाते अलग-अलग डिपॉजिटरी व ट्रेडिंग मेंबर के पास हो सकते हैं, लेकिन ये सभी एक ही पैन से जुड़े होते हैं। बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि शुद्ध रूप से इक्विटी में सौदा करने वाले यूनिक निवेशकोंं की संख्या 5 करोड़ से कम हो सकती है क्योंकि एनएसई मेंं पंजीकृत निवेशक अन्य योजनाओं मसलन सोना व बॉन्ड में भी सौदा करते हैं। उद्योग के प्रतिभागियोंं ने कहा कि एनएसई के यूनिक इन्वेस्टर खाते का 10 से 20 फीसदी सिर्फ एमएफ या अन्य परिसंपत्ति वर्ग में सौदा करता है।