देश रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) बाजार वित्त वर्ष 20 में 271 अरब रुपये था जो बढ़कर वित्त वर्ष 26 के पहले नौ महीने तक छह गुना से अधिक हो गया है। यह बाजार अब 1,726 अरब रुपये का है। रियल एस्टेट विश्लेषण कंपनी सीबीआरई की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है।
यह इजाफा शेयर बाजार में नई कंपनियों के सूचीबद्ध होने के साथ-साथ मौजूदा रीट की यूनिटों की कीमतों में निरंतर बढ़ोतरी से हुआ है। इनमें से 4 ने वित्त वर्ष 25 की तीसरी तिमाही और वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के बीच सालाना आधार पर यूनिट मूल्य में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है। सीबीआरई के चेयरमैन और मुख्य कार्य अधिकारी (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा, ‘भारत के रीट बाजार ने अस्थिर वैश्विक चक्र के दौरान निवेशकों को लगातार रिटर्न दिया है।’
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अनुसार रीट के लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना और अपनी कर योग्य आय का कम से कम 90 प्रतिशत वितरित करना अनिवार्य होता है। रीट वितरण में लाभांश, ब्याज, विशेष उद्देश्य वाली कंपनियों (एसपीवी) से प्राप्त ऋण वसूली, अन्य आय या ये सभी शामिल हो सकते हैं।
शेयर बाजार में देश के 5 रीट सूचीबद्ध हैं – ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट, एम्बेसी ऑफिस पार्क्स रीट, नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट (केआरटी), माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट और नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट। पांचवी रीट केआरटी 18 अगस्त, 2025 को सूचीबद्ध हुआ था।
रिपोर्ट में साल 2026 और उसके बाद रीट को व्यापक रूप से अपनाने में समर्थन करने वाली तीन नियामकीय परिवर्तनों के बारे में बताया गया है। इनमें जनवरी 2026 से रीट को इक्विटी संबंधी साधन के रूप में फिर से वर्गीकृत करने का सेबी का निर्णय शामिल है, जिससे तरलता बेहतर होने की उम्मीद है। इससे उन म्युचुअल फंडों और विशेष निवेश फंडों की व्यापक भागीदारी संभव हो सकेगी, जो पहले हाइब्रिड निवेश सीमा के तहत आते थे।