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तेल में उबाल से सहमे ग्लोबल बाजार, एशिया-यूरोप में भारी गिरावट; होर्मुज संकट से बढ़ी महंगाई की चिंता

ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने और इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी देने की खबरों के बाद बाजार में भारी घबराहट देखी गई

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- March 03, 2026 | 11:10 PM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के चौथे दिन में प्रवेश करने के साथ ही मंगलवार को दुनिया भर के शेयर बाजारों में बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के मद्देनजर निवेशक सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों का रुख कर रहे हैं। एशिया के अधिकतर बाजारों में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7.2 फीसदी टूट गया जो 19 महीने में सबसे बड़ी गिरावट है। यूरोपीय बाजार भी गिरावट में खुले और क्षेत्रीय युद्ध का दायरा बढ़ने के डर से जर्मनी, फ्रांस तथा इटली के बाजारों में 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई।

होली के कारण भारत का शेयर बाजार आज बंद रहा मगर आगे के लिए बाजार में नरमी के संकेत दिख रहे हैं। गिफ्ट सिटी में एसजीएक्स निफ्टी फ्यचूर्स 2.5 फीसदी गिरकर 24,380 पर बंद हुआ। ऐसे में बुधवार को जब घरेलू बाजार में ट्रेडिंग शुरू होगी तो बाजार में गिरावट और बढ़ सकती है।

ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने और इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी देने की खबरों के बाद बाजार में भारी घबराहट देखी गई। होर्मुज वैश्विक बाजार में माल की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। कैपलर के आंकड़ों के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट से हर दिन 1.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही होती है, जो समुद्री रास्ते से होने वाले कुल वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का करीब एक-तिहाई है।

कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 8 फीसदी चढ़कर 84 डॉलर प्रति बैरल हो गया जबकि अमेरिकी क्रूड में भी बढ़त जारी रही। दो सत्र में प्राकृतिक गैस की कीमतें 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ गईं, जिससे दुनिया भर में महंगाई का दबाव फिर से बढ़ने का डर बढ़ गया। इस बीच सोने के दाम में 5 सत्र से लगातार तेजी बनी हुई है और यह चार हफ़्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि तनाव कम होने का कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं होने की वजह से निवेशक ज्यादा उतार-चढ़ाव के लिए तैयार थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा की आपूर्ति में कोई और रुकावट वैश्विक महंगाई और ब्याज दर में कटौती को मुश्किल बना सकती है।

भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को देखते हुए बहुत कुछ दांव पर लगा है। देश अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चे तेल का आयात करता है जिनमें से करीब आधे से ज्यादा पश्चिम एशिया से आता है। भारत के शीर्ष 10 कच्चे तेल के आपूर्ति देशों में से 6 इसी क्षेत्र के हैं।तेल के अलावा कतर और संयुक्त अरब अमीरात एलएनजी के मुख्य आपूर्तिकर्ता हैं। कतर के अपने सबसे बड़े गैस प्लांट को बंद करने की खबरों के बाद ईंधन आपूर्ति की चिंता और बढ़ गई है।

डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि घरेलू बाजार पर भी लड़ाई बढ़ने के संकेत का असर पड़ेगा। अगर दो हफ्ते में टकराव खत्म होता है तो बाजार में जल्द तेजी लौट सकती है। मगर होर्मुज स्ट्रेट में कोई भी सख्ती या बाधा वृहद आर्थिक स्तर पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 0.35 फीसदी बढ़ सकता है और महंगाई में 20 से 30 आधार अंक का इजाफा हो सकता है।

डॉयचे बैंक के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक दास ने वृद्धि और नीति के जाखिम पर ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा, ‘आम तौर पर वैश्विक तेल की कीमतों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी से वृद्धि दर में 10 से 20 आधार अंक की कमी आ सकती है। अगर तेल के ऊंचे दाम ग्राहकों को वहन करने पड़े तो खपत मांग में कमी आ सकती है।’

First Published : March 3, 2026 | 11:10 PM IST