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दुनिया भर में हथियारों का स्टॉक फिर भरने की तैयारी, BEL, HAL और Astra Micro पर ब्रोकरेज बुलिश

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पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बीच रक्षा उपकरणों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। मोतीलाल ओसवाल ने BEL, HAL और Astra Micro पर भरोसा जताया है

Last Updated- June 18, 2026 | 3:28 PM IST
Defence Stocks

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों के बीच अब एक नया सवाल खड़ा हो रहा है। जंग खत्म होने के बाद क्या होगा? जवाब सीधा है। जिन देशों ने युद्ध के दौरान बड़ी मात्रा में मिसाइलें, गोला-बारूद और डिफेंस उपकरण इस्तेमाल किए हैं, उन्हें अब अपना स्टॉक फिर से भरना होगा। पुराने सिस्टम अपग्रेड होंगे, नए हथियार खरीदे जाएंगे और डिफेंस पर खर्च बढ़ेगा। यही वजह है कि डिफेंस क्षेत्र की कंपनियों के लिए आने वाले साल काफी व्यस्त रह सकते हैं।

ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि अब फोकस सिर्फ टैंक, लड़ाकू विमान और युद्धपोत तक सीमित नहीं रहेगा। ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, एयर डिफेंस सिस्टम और स्मार्ट हथियारों की मांग भी तेजी से बढ़ सकती है। इसका फायदा भारतीय डिफेंस कंपनियों को घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों में मिल सकता है।

डिफेंस कंपनियों के पास काम की कमी नहीं

पिछले कुछ सालों में भारत ने डिफेंस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर काफी जोर दिया है। इसका असर अब कंपनियों की ऑर्डर बुक में दिखाई देने लगा है। कई डिफेंस कंपनियों के पास पहले से ही हजारों करोड़ रुपये के ऑर्डर मौजूद हैं और आने वाले समय में इसमें और इजाफा होने की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले दो साल में कंपनियों की कमाई और कारोबार बढ़ाने में इन बड़े ऑर्डरों की अहम भूमिका रहेगी।

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HAL को मिला सबसे बड़ा जैकपॉट

पिछले वित्त वर्ष में सबसे बड़ी खबर HAL के खाते में आई। कंपनी को 97 अतिरिक्त तेजस Mk1A लड़ाकू विमान बनाने का करीब 62,700 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला। यह सिर्फ एक ऑर्डर नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत है कि सरकार स्वदेशी डिफेंस उत्पादन पर कितना जोर दे रही है।

BEL की झोली भी भरती रही

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) के लिए भी साल शानदार रहा। कंपनी को करीब 30,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले। इनमें रडार सिस्टम, एयर डिफेंस फायर कंट्रोल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण और तेजस कार्यक्रम से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। यही वजह है कि ब्रोकरेज आज भी BEL को डिफेंस क्षेत्र की सबसे पसंदीदा कंपनी मान रहा है।

अब किन बड़े ऑर्डरों का इंतजार?

डिफेंस क्षेत्र में कई ऐसे मेगा प्रोजेक्ट हैं जिन पर बाजार की नजर टिकी हुई है। इनमें QRSAM मिसाइल सिस्टम, अगली पीढ़ी के युद्धपोत, नई पनडुब्बियां, सुखोई फाइटर जेट अपग्रेड, AMCA फाइटर जेट प्रोग्राम और 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद शामिल है। अगर इनमें से कुछ प्रोजेक्ट भी अगले एक-दो साल में मंजूर हो जाते हैं तो कई डिफेंस कंपनियों की ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है।

3.3 लाख करोड़ रुपये का राफेल दांव

भारत 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये के इस संभावित सौदे में बड़ी दिलचस्प बात यह है कि 90 विमान भारत में बनाए जा सकते हैं। इससे भारतीय डिफेंस कंपनियों को भी बड़ा काम मिलने की संभावना है।

ड्रोन अब बन रहे हैं असली गेमचेंजर

हाल के युद्धों ने एक बात साफ कर दी है। अब लड़ाई सिर्फ टैंक और लड़ाकू विमानों से नहीं जीती जाती। ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम और स्मार्ट सर्विलांस उपकरण तेजी से अहम बन रहे हैं। यही कारण है कि डिफेंस मंत्रालय और सेनाएं इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही हैं। भारतीय कंपनियों के लिए यह एक नया और तेजी से बढ़ता बाजार बन सकता है।

डिफेंस निर्यात ने भी पकड़ी रफ्तार

भारत अब सिर्फ अपने लिए हथियार नहीं बना रहा, बल्कि दुनिया को भी बेच रहा है। FY26 में देश का डिफेंस निर्यात 63 फीसदी बढ़कर 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। भारत अब 80 से ज्यादा देशों को डिफेंस उपकरण बेच रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और युद्धपोत जैसे उत्पादों की मांग बढ़ रही है।

सिर्फ पार्ट्स नहीं, अब तकनीक भी भारत के पास

पहले भारतीय कंपनियां ज्यादातर विदेशी कंपनियों के लिए पुर्जे बनाती थीं। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। GE, Safran, Airbus, Tata Advanced Systems, L&T और भारत फोर्ज जैसी कंपनियां तकनीक साझा करने और संयुक्त विकास परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियां सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, बल्कि डिजाइन और तकनीक के स्तर पर भी बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

किस शेयर पर सबसे ज्यादा भरोसा?

मोतीलाल ओसवाल की पहली पसंद भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) बनी हुई है। ब्रोकरेज ने BEL पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 510 रुपये का टारगेट रखा है। HAL पर भी भरोसा कायम है और उसके लिए 5,500 रुपये का टारगेट दिया गया है। एस्ट्रा माइक्रोवेव पर भी ब्रोकरेज सकारात्मक है और उसके लिए 1,580 रुपये का टारगेट रखा गया है। वहीं भारत डायनेमिक्स (BDL) और जेन टेक्नोलॉजीज (ZEN Technologies) पर फिलहाल न्यूट्रल रुख बरकरार है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

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First Published - June 18, 2026 | 3:27 PM IST

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