facebookmetapixel
Advertisement
रियल एस्टेट सेक्टर में बदला ट्रेंड: अब अंधाधुंध विस्तार नहीं, प्रोजेक्ट पूरे करने पर डेवलपर्स का जोरJSW MG मोटर का बड़ा धमाका: ‘MG चार्ज’ के तहत देश भर में लगाए 1,000 सामुदायिक चार्जरभारत के टैक्सी बाजार में वियतनाम के विनग्रुप की एंट्री, NCR में शुरू हुई ‘ग्रीन SM’ EV कैबयात्री वाहनों से अलग होकर नए सफर पर टाटा मोटर्स CV, चेयरमैन चंद्रशेखरन ने बताया भविष्य का प्लानडाउन पेमेंट की टेंशन खत्म! मारुति सुजूकी ने शुरू की ‘सुहाना सफर’ योजना, अब RD बचत कार खरीद सकेंगेपरीक्षा विवादों के चक्रव्यूह में घिरे धर्मेंद्र प्रधान, मुश्किलों से नहीं छूट रहा पीछाEditorial: ट्रंप टैरिफ के एक साल पूरे, अमेरिकी दावों की खुली पोलवैश्विक व्यवस्था में बढ़ा सौदेबाजी का चलन, क्या भारत बनेगा नई उम्मीदShare Market: RBI के फैसले के बाद क्यों गिरा शेयर बाजार?मध्य प्रदेश कांग्रेस में असंतोष की लहर! मीनाक्षी नटराजन के राज्य सभा में जाने की राह मुश्किल क्यों?

FPI ने सितंबर में भारतीय शेयर बाजारों से 14,767 करोड़ रुपये निकाले

Advertisement

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सितंबर में शुद्ध रूप से 14,767 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।

Last Updated- October 01, 2023 | 1:54 PM IST
FPI

डॉलर में मजबूती, अमेरिका में बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) सितंबर में भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे हैं।

लगातार छह माह तक लिवाली के बाद FPI ने सितंबर में भारतीय शेयर बाजारों से 14,767 करोड़ रुपये की निकासी की है। क्रेविंग अल्फा के प्रबंधक-स्मॉलकेस और प्रमुख भागीदार मयंक मेहरा ने कहा, ‘‘आगे चलकर भारतीय बाजारों में एफपीआई का प्रवाह अनिश्चित रहेगा। काफी हद तक यह भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन, रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा और कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों पर निर्भर करेगा।’’

यह भी पढ़ें : Market Cap: सेंसेक्स की टॉप 10 में से 5 कंपनियों का बाजार पूंजीकरण घटा

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशको (FPI) ने सितंबर में शुद्ध रूप से 14,767 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इससे पहले अगस्त में शेयरों में एफपीआई का प्रवाह चार माह के निचले स्तर 12,262 करोड़ रुपये पर आ गया था। वहीं एफपीआई मार्च से अगस्त तक लगातार छह माह भारतीय शेयरों में शुद्ध लिवाल रहे थे।

इस दौरान उन्होंने 1.74 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, ‘‘डॉलर की मजबूती की वजह से एफपीआई बिकवाली कर रहे हैं। डॉलर सूचकांक 107 के करीब है। इसके अलावा अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल (10 साल के लिए 4.7 प्रतिशत) आकर्षक बना हुआ है, ऐसे में एफपीआई बिकवाल बने हुए हैं। ब्रेंट कच्चे तेल का दाम 97 डॉलर प्रति बैरल पर है। यह भी एफपीआई की बिकवाली की एक वजह है।’’

यह भी पढ़ें: IPO: एजिलस डायग्नोस्टिक्स ने आईपीओ के लिए दाखिल किए दस्तावेज, 142.3 मिलियन शेयरों से जुटाएगी फंड

मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक – प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘अमेरिका और यूरो क्षेत्र में आर्थिक अनिश्चितता के अलावा वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर बढ़ती चिंता की वजह से भी एफपीआई बिकवाली कर रहे हैं। इन स्थितियों की वजह से एफपीआई जोखिम लेने से बच रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा कच्चे तेल के ऊंचे दाम, महंगाई के आंकड़े और बढ़ती ब्याज दरें भी एफपीआई की धारणा को प्रभावित कर रही हैं।

आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन अवधि में एफपीआई ने ऋण या बॉन्ड बाजार में 938 करोड़ रुपये डाले हैं। इस तरह चालू कैलेंडर साल में अबतक शेयरों में एफपीआई का निवेश 1.2 लाख करोड़ रुपये रहा है। वहीं बॉन्ड बाजार में उन्होंने 29,000 करोड़ रुपये से ज्यादा डाले हैं।

यह भी पढ़ें: Accenture के पूर्वानुमान पर विश्लेषकों ने दिया संकेत….आईटी क्षेत्र की मांग सुधरने में लग सकता है वक्त

Advertisement
First Published - October 1, 2023 | 1:42 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement