अगस्त में शेयर बाजार में प्रवेश करने वाली आठ में से पांच कंपनियां गिरावट के साथ सूचीबद्घ हुईं। न्यूवोको विस्टास, विंडलाज बायोटेक, और कारट्रेड टेक अपने निर्गम भाव के मुकाबले नीचे सूचीबद्घ हुए। मंगलवार को एप्टस वैल्यू हाउसिंग फाइनैंस और केमप्लास्ट सन्मार के शेयर अपने निर्गम भाव के मुकाबले गिरावट के साथ सूचीबद्घ हुए। एप्टस वैल्यू हाउसिंग 329.95 रुपये पर सूचीबद्घ हुआ, जो उसकी निर्गम कीमत के मुकाबले 6.5 प्रतिशत नीचे है। यह शेयर कारोबारी सत्र के दौरान कुछ मजबूत हुआ था और आखिर में 346.50 रुपये पर बंद हुआ, जो निर्गम भाव की तुलना में 1.8 प्रतिशत की कमजोरी है। दूसरी तरफ, केमप्लास्ट सन्मार अपने निर्गम भाव से करीब 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ सूचीबद्घ हुआ। यह शेयर कारोबार के अंत में 534.90 रुपये पर बंद हुआ, जो उसकी निर्गम कीमत से 1.13 प्रतिशत कम है।
केएफसी और पिज्जा हट की फ्रैंचाइजी देवयानी इंटरनैशनल का शेयर सूचीबद्घता के दिन 56 प्रतिशत चढ़ा और यह इस महीने मजबूत शुरुआत करने वाला एकमात्र शेयर रहा। विश्लेषकों का कहना है कि समान सप्ताह में बाजार में कई तरह की समस्याओं की वजह से भी निवेशक धारणा प्रभावित हुई। केजरीवाल रिसर्च ऐंड इन्वेस्टमेंट्स सर्विसेज के संस्थापक अरुण केजरीवाल ने कहा, ‘सूचीबद्घता का सिलसिला समाप्त हो गया है। हमने लगातार कुछ सप्ताह कई निर्गम दर्ज किए। आईपीओ लाने वाली कंपनियों ने मांग समाप्त कर दी। मान लीजिए कि मूल्यांकन काफी बढ़ गया हो, तो उस स्थिति में कई दिन की सूचीबद्घता तेजी समाप्त हो जाती है।’
प्रमुख बाजारों में बिकवाली दबाव की वजह से कुछ विश्लेषकों ने इसे सुस्त सूचीबद्घता करार दिया है। हालांकि मुख्य सूचकांक अभी भी अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तरों के आसपास मंडरा रहे हैं, लेकिन इस महीने मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में बिकवाली दबाव रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (रिटेल रिसर्च) सिद्घार्थ खेमका ने कहा, ‘इस समय बाजारों पर खुद ही दबाव है। अगर छिटपुट मौकों को छोड़कर बाजार अच्छा नहीं कर रहा है तो स्टॉक के सूचीबद्धता लाभ देने के अवसर भी कम हैं। इनमें से तमाम कंपनियां उस समय बाजार में आईं जब मूल्यांकन पहले ही चढ़ा हुआ था। बाजार के चढ़े होने पर प्रवर्तकों से तो डिस्काउंट की उम्मीद नहीं की जा सकती है। वे तो तेजी वाले बाजार का फायदा उठाने की कोशिश करेंगे और शेयरों के भाव में आक्रामकता दिखाएंगे।’
खेमका ने कहा कि किसी भी शेयर को उसकी सूचीबद्धता वाले दिन के प्रदर्शन से आंकना सही नहीं है। उन्होंने कहा, ‘डिस्काउंट दर पर सूचीबद्धता का यह मतलब नहीं है कि शेयर लंबी अवधि में अच्छा प्रदर्शन नहीं करेगा। समस्या यह है कि जब समूचा बाजार प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गमों (आईपीओ) को एक दिन के खेल के रूप में देख रहा है। कई अच्छी कंपनियां रियायती दर पर सूचीबद्ध हुई हैं जिनमें इन्फोसिस भी शामिल है। किसी भी शेयर का भविष्य उस कंपनी के दीर्घावधि प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इसी तरह किसी शेयर के चढ़कर सूचीबद्ध होने का भी यह मतलब नहीं है कि वह निवेशकों को आगे भी बढिय़ा रिटर्न देगा। अगर आप सूचीबद्धता के लाभ को देख रहे हैं तो यह पूरी तरह बाजार की धारणा पर निर्भर करता है।’
जानकारों ने खुदरा निवेशकों को आईपीओ में निवेश करने के पहले बाजार की धारणा एवं स्टॉक के बुनियादी पहलुओं पर गौर करने की सलाह दी है। स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बलिगा कहते हैं, ‘लगता है कि आईपीओ पार्टी अब खत्म हो चली है। लेकिन यह पिछली सूचीबद्धता जितना ही अच्छा होता है। जब तक सूचीबद्धता से जुड़ी कहानियां मौजूद हैं तब तक कोई निवेशक उस खेल का हिस्सा बन सकता है। जब तक आपको अच्छे भाव पर आईपीओ न मिले तब तक उसके लिए आवेदन करना सही नहीं है।’