facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

तेल की कीमतों में उछाल के बीच ये 4 Energy stocks बने ब्रोकरेज के फेवरेट, 91% तक अपसाइड के टारगेट

Advertisement

अगर यह संघर्ष अगले छह महीने तक जारी रहता है, तो वित्त वर्ष 2027 में तेल की औसत कीमत करीब 80 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है

Last Updated- March 16, 2026 | 11:10 AM IST
Crude Oil Prices

Oil and Gas Stocks: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा झटका दिया है। ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के अनुसार इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। मार्च 2026 में तेल की औसत कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि युद्ध से पहले यह 70 से 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। अगर यह संघर्ष अगले छह महीने तक जारी रहता है, तो वित्त वर्ष 2027 में तेल की औसत कीमत करीब 80 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है।

ONGC और ऑयल इंडिया के लिए सुनहरा मौका

रिपोर्ट के मुताबिक ऊंचे तेल दाम का सबसे ज्यादा फायदा अपस्ट्रीम कंपनियों को होगा। एंटीक का अनुमान है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो ONGC और ऑयल इंडिया की कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। वित्त वर्ष 2027 में ONGC का EBITDA करीब 30 प्रतिशत बढ़कर लगभग 923 अरब रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि ऑयल इंडिया का EBITDA लगभग 28 प्रतिशत बढ़कर 127 अरब रुपये तक जा सकता है।

ब्रोकरेज ने इन दोनों कंपनियों पर अपनी BUY रेटिंग बरकरार रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक ONGC का मौजूदा भाव लगभग 266 रुपये है और इसका टारगेट प्राइस 335 रुपये रखा गया है, यानी मौजूदा स्तर से करीब 26 प्रतिशत तक संभावित रिटर्न मिल सकता है। वहीं ऑयल इंडिया का मौजूदा भाव करीब 470 रुपये है और इसका टारगेट प्राइस 567 रुपये तय किया गया है, जो करीब 21 प्रतिशत की संभावित बढ़त दिखाता है। रिपोर्ट का कहना है कि मजबूत कमाई की संभावना के बावजूद इन कंपनियों के शेयर अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से नीचे कारोबार कर रहे हैं, इसलिए मौजूदा स्तर निवेश के लिहाज से आकर्षक माने जा रहे हैं।

यह पढ़ें: 5% और गिर सकते हैं सेंसेक्स-निफ्टी? नोमुरा ने निफ्टी टारगेट 15% घटाया, कहा – आगे और आ सकता है करेक्शन

Oil and Gas Stocks: BPCL, HPCL और IOC पर बढ़ सकता है दबाव

वहीं दूसरी ओर तेल मार्केटिंग कंपनियों यानी BPCL, HPCL और IOC पर ऊंचे कच्चे तेल के दाम का दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमत करीब 80 डॉलर प्रति बैरल बनी रहती है और पेट्रोल तथा डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया जाता, तो इन कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में पेट्रोल और डीजल पर नुकसान बढ़कर लगभग 2.7 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता है, जिससे कंपनियों के मुनाफे में तेज गिरावट आ सकती है।

इसके बावजूद एंटीक का मानना है कि हाल की गिरावट के बाद इन कंपनियों के शेयर आकर्षक हो गए हैं। ब्रोकरेज ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) पर भी BUY रेटिंग बरकरार रखी है। HPCL का मौजूदा भाव लगभग 369 रुपये है और इसका टारगेट प्राइस 705 रुपये रखा गया है, यानी मौजूदा स्तर से करीब 91 प्रतिशत तक संभावित बढ़त बनती है। रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के बाद OMC कंपनियों के शेयर लगभग 15 से 16 प्रतिशत तक गिर चुके हैं, जो संभावित जोखिम से ज्यादा मानी जा रही है।

सरकार के कदम से मिल सकती है राहत

हालांकि रिपोर्ट का मानना है कि यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। अगर तेल कंपनियों पर लंबे समय तक दबाव बना रहता है, तो सरकार आमतौर पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती या पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे कदम उठाती है। इससे कंपनियों को राहत मिलती है और उनके मार्जिन फिर से सुधर सकते हैं।

इसी वजह से मौजूदा स्तर पर इन कंपनियों के शेयर लंबी अवधि के निवेश के लिए आकर्षक नजर आ रहे हैं, हालांकि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

गैस कंपनियों पर मिला-जुला असर

रिपोर्ट के मुताबिक गैस कंपनियों पर इसका असर अलग-अलग तरीके से पड़ सकता है। Petronet LNG पर मुख्य असर LNG की सप्लाई कम होने से वॉल्यूम घटने के रूप में दिख सकता है। वहीं GAIL पर वॉल्यूम के साथ-साथ मार्जिन पर भी दबाव रह सकता है। हालांकि शेयर में आई तेज गिरावट के बाद ब्रोकरेज ने GAIL की रेटिंग HOLD से बढ़ाकर BUY कर दी है। इसका टारगेट प्राइस 172 रुपये प्रति शेयर रखा गया है, जो मौजूदा स्तर से करीब 16 प्रतिशत तक बढ़त का संकेत देता है।

यह पढ़ें: US-Iran War Impact: पश्चिम एशिया के तनाव से भारतीय रत्न-आभूषण निर्यात को झटका, 20% तक गिरावट

CGD कंपनियों के लिए मुश्किल दौर

रिपोर्ट में कहा गया है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। महंगे LNG, गैस की कमी और औद्योगिक मांग में गिरावट के कारण IGL, MGL और गुजरात गैस जैसी कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा APM गैस की आपूर्ति धीरे-धीरे खत्म होने से भी इन कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।

Oil and Gas Stocks: सेक्टर पर ब्रोकरेज की राय

एंटीक की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा हालात में ऊर्जा सेक्टर के भीतर अलग-अलग हिस्सों में अलग तस्वीर दिखाई दे रही है। अपस्ट्रीम कंपनियों, OMC कंपनियों और Petronet LNG पर ब्रोकरेज का नजरिया सकारात्मक है, जबकि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों पर दबाव बने रहने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच अपस्ट्रीम कंपनियां सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही हैं और इनमें कमाई बढ़ने की संभावना सबसे ज्यादा है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

Advertisement
First Published - March 16, 2026 | 11:01 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement