Stock Market Outlook: ईरान और अमेरिका के बीच जंग छिड़ने के बाद से भारतीय शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत का बाजार मार्केट कैप लगभग 447 अरब डॉलर घटकर 4.7 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर रह गया है। इससे पहले इस तरह की गिरावट कोविड-19 के दौरान मार्च 2020 में देखी गई थी।
वैश्विक स्तर पर बाजारों में भारी बिकवाली हो रही है। दुनिया भर के बाजारों का कुल मार्केट कैप 8.5 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा गिरकर 148.9 लाख करोड़ डॉलर रह गया है। बाजारों में आई व्यापक गिरावट निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाती है। पमिडिल ईस्ट में संघर्ष वैश्विक आर्थिक ग्रोथ को कमजोर कर सकता है और आपूर्ति में बाधा पैदा कर सकता है।
इस बीच, जापान की ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने Nifty-50 को लेकर अपना टारगेट घटा दिया है। ब्रोकरेज ने दिसंबर 2026 के लिए निफ्टी 50 का टारगेट 15 प्रतिशत घटाकर 24,900 कर दिया है। पहले यह लक्ष्य 29,300 था। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण कंपनियों की कमाई के अनुमान पर खतरा बढ़ गया है। इसलिए यह कटौती की गई है।
नोमुरा ने रिपोर्ट में कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो वित्त वर्ष 2026- 27 के लिए कंपनियों की कमाई के मौजूदा अनुमान में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट का जोखिम है। रिपोर्ट के अनुसार, मूल अनुमान के मुताबिक कंपनियों की कमाई के अनुमान में करीब 7.5 प्रतिशत की कमी हो सकती है। साथ ही बाजार के प्राइस-टू-अर्निंग (पी/ई) रेश्यो को पहले के 21 गुना से घटाकर 18.5 गुना माना गया है।
ब्रोकरेज ने दिसंबर 2026 के लिए Nifty का टारगेट 21,000 से 29,100 के दायरे में रखा है। बेहतर स्थिति में यह मानकर लक्ष्य तय किया गया है कि वैश्विक राजनीतिक तनाव जल्दी कम हो जाएगा।
पिछले दो हफ्तों में भारतीय शेयर बाजार में 8 प्रतिशत की गिरावट आई है। निफ्टी और निफ्टी बैंक दोनों अपने-अपने रिकॉर्ड हाई लेवल से 13 प्रतिशत नीचे आ चुके हैं। इससे पहले ऐसी गिरावट केवल दो बार ही देखी गई है। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के दौरान।
बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी-50 और सेंसेक्स ने पिछले हफ्ते (9 मार्च – 13 मार्च) में कई वर्षों में अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। इसकी मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध रहा जसिके कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। कच्चे तेल के महंगा होने से महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासकर भारत जैसे देश के लिए जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट भविष्य में बाजार में लगभग 5 प्रतिशत और गिरावट आ सकती है। खासकर स्मॉल और मिडकैप शेयरों में ज्यादा जोखिम दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से निवेश कम होता है या पैसा निकलता है, तो इससे शॉर्ट टर्म में बाजार और नीचे जा सकता है।
हालांकि, ब्रोकरेज का कहना है कि अगर मौजूदा स्तर से 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आती है, तो लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह खरीदारी का अच्छा मौका हो सकता है। ब्रोकरेज का मानना है कि यूटिलिटी, कोयला, तेल उत्पादक कंपनियां, हेल्थकेयर, दवा, रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान (स्टेपल्स) और टेलीकॉम जैसे सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। नोमुरा ने कहा कि बुनियादी तौर पर उन्हें इन सेक्टरों की स्थिति अच्छी लगती है। लेकिन हेल्थकेयर सेवाएं और उपभोक्ता स्टेपल्स में शेयरों के दाम पहले से काफी हाई लग रहे हैं।