बैंकिंग शेयरों में तेजी से इस क्षेत्र के फंडों को मजबूती मिली है। पिछले साल काफी समय तक इन फंडों पर दबाव बना हुआ था।
बैंकिंग श्रेणी ने पिछले तीन महीनों में 35 प्रतिशत से ज्यादा का प्रतिफल दिया है, जो अन्य सेक्टोरल और थीमेटिक फंडों के मुकाबले ज्यादा है। वैल्यू रिसर्च के आंकड़े से पता चलता है कि तुलनात्मक रूप से, फार्मा और आईटी फंडों ने 10.4 प्रतिशत और 19.6 प्रतिशत का प्रतिफल दिया है। खपत-आधारित फंडों ने इस अवधि में 22 प्रतिशत का प्रतिफल दिया।
हालांकि इन फंडों के लिए एक वर्षीय प्रतिफल (10.7 प्रतिशत) अभी भी प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम है।
इस श्रेणी में शीर्ष प्रदर्शकों में टाटा बैंकिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (15.6 प्रतिशत) और एसबीआई बैंकिंग एवं फाइनैंशियल सर्विसेज फंड (16.3 प्रतिशत) और सुंदरम फाइनैंस सर्विसेज अपॉ. (15.5 प्रतिशत) शामिल रहे।
बैंकिंग फंड न सिर्फ बैंकों में निवेश करते हैं बल्कि वे पूरे वित्तीय सेवा क्षेत्र की इकाइयों में पैसा लगाते हैं जिनमें संपत्ति प्रबंधन, आवासीय वित्त, रेटिंग एजेंसियां, ब्रोकिंग, गैर-बैंकिंग त्तिीय कंपनियां (एनबीएफसी) और सूक्ष्म वित्त संस्थान शामिल हैं।
बीएफएसआई सेक्टर का प्रदर्शन 2020 में प्रमुख सूचकांक के मुकाबले कमजोर रहा। मोरेटोरियम से संबंधित समस्याओं और व्यवस्था में दबाव की वजह से इस क्षेत्र का प्रदर्शन प्रभावित हुआ। हालांकि वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही और वित्त वर्ष 2021 की तीसरी तिमाही, दोनों में पूरे बैंकिंग सेक्टर के लिए परिचालन एवं वित्तीय प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और बैंकिंग सेक्टर में एनपीए से मुकाबले के उपायों की घोषणा के बाद निफ्टी बैंक सूचकांक चढ़कर सर्वाधिक ऊंचाई पर पहुंच गया था।
बजट और परिचालन प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए ऐक्सिस सिक्योरिटीज ने हाल में बीएफएसआई के लिए अपनी रेटिंग बदलकर ‘ओवरवेट’ की है। ब्रोकरेज फर्म ने एक रिपोर्ट में कहा है, ‘बैंकों का ध्यान अब वृद्घि पर केंद्रित हो गया है और जैसे ही वृहद आर्थिक चक्र में सुधार आएगा, ऋण पर दांव से जुड़े बैंकों को मजबूत आय वृद्घि में मदद मिलेगी।’
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने दिसंबर में समाप्त हुई तिमाही में 7.5 अरब डॉलर का निवेश किया। इससे पहले जनवरी में उन्होंने 34.5 करोड़ डॉलर की निकासी की थी।
बैंकों के लिए सभी व्यावसायिक सेगमेंटों में व्यवसाय की गति सुधरी है। जमाओं में वृद्घि मजबूत बनी हुई है और सीएएसए से सकारात्मक रुझान का संकेत मिला है। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के अनुसार, परिसंपत्ति गुणवत्ता भी उम्मीद के मुकाबले काफी बेहतर है। संग्रह क्षमता में सुधार, फंसे कर्ज पर नियंत्रण और कम पुर्नठन से बैंकों को मदद मिली है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘बड़े बैंक ऊंचे प्रोफॉर्मा प्रावधान कवरेज और कम पुनर्गठन के साथ बेहतर स्थिति में हैं, जबकि मझोले आकार के बैंक काफी हद तक दबाव में दिख रहे हैं। कुल मिलाकर, हमें बड़े बैंकों में आय में तेजी से सुधार की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें ऋण लागत में नरमी और परिचालन प्रदर्शन में सुधार से मदद मिलेगी।’