नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सोमवार को कहा कि नए कृषि कानूनों के बारे में गलत बयानी से किसानों के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी काफी नुकसान हो रहा है। साथ ही उन्होंने इन नए कृषि कानूनों के बारे में कुछ अर्थशास्त्रियों द्वारा अपना रुख बदलने को लेकर निराशा भी जताई। नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि वह पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु सहित कुछ भारतीय अर्थशास्त्रियों के बदले रवैये से क्षुब्ध हैं क्योंकि ये लोग कृषि सुधारों का समर्थन किया करते थे लेकिन यही लोग अब पाला बदलकर दूसरी भाषा बोल रहे हैं।
राजीव कुमार की यह टिप्पणी बसु द्वारा एक अन्य अर्थशास्त्री निर्विकार सिंह के साथ लिखे गए लेख की पृष्ठभूमि में आई है। इन अर्थशास्त्रियों ने लिखा है कि सरकार को कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए और नए कानूनों का मसौदा तैयार करने में जुटना चाहिए जो कुशल और निष्पक्ष हों। कुमार ने कहा, ‘इन 3 कृषि कानूनों से बड़ी कंपनियों के हाथों किसानों का शोषण होने लगेगा, जैसी कोई भी बहस पूरी तरह से झूठ है।’