Water Crisis: देश के ज्यादातर राज्यों में गर्मियों की शुरुआत के साथ लोगों को पानी की कमी से दो-चार होना
पड़ रहा है। गर्मियों में जैसे-जैसे उत्तराखंड में तापमान बढ़ता है, पहाड़ी राज्य में पानी की कमी गहराती जा रही है।
बता दें कि यह जल संकट (Water Crisis) सर्दियों में कम वर्षा और बर्फबारी के कारण दोगुना हो गया है। इसे देखते हुए पुष्कर धामी सरकार ने पानी का ज्यादा जरूरत वाले जगहों पर इस्तेमाल करने के लिए कार वॉश (Car Wash) पर बैन लगा दिया है।
सीएम धामी ने की बैठक
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Dhami) ने शनिवार को एक वर्चुअल बैठक में सभी जिलाधिकारियों (DMs) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गाड़ियों की वर्कशॉप में कारों को पानी के बजाय “ड्राई वॉश” किया जाए।
उल्लेखनीय है कि गर्मियों के दौरान पहाड़ी राज्य को अक्सर पीने के पानी की कमी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। देहरादून समेत उत्तराखंड के छह शहर गंभीर जल संकट की स्थिति का सामना कर रहे हैं।
देहरादून, नैनीताल, पिथौरागढ़, डीडीहाट, कोटद्वार और चंपावत में स्थिति सबसे खराब
एक बैठक में उत्तराखंड के सचिव अरविंद ह्यांकी ने धामी को बताया कि गंभीर कमी वाले 317 गांवों और 148 शहरी इलाकों की पहचान की गई है। पानी की कमी की सबसे ज्यादा शिकायतें देहरादून, नैनीताल, पिथौरागढ़, डीडीहाट, कोटद्वार और चंपावत से मिल रही हैं।
उत्तराखंड के अन्य क्षेत्र जैसे नवादा, हरिपुर, माजरी माफ़ी, मोहकमपुर और बद्रीपुर में भी पानी की कमी की सूचना मिली है। निवासी कथित तौर पर पानी के टैंकरों पर निर्भर होकर संकट से जूझ रहे हैं।
भाजपा नेता ने उत्तराखंड जल निगम पर दागे सवाल
भाजपा (BJP) नेता एनके गुसाईं ने इन क्षेत्रों में पानी की समस्या का शीघ्र समाधान करने की मांग की है। उन्होंने उत्तराखंड जल निगम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ‘माजरी माफी’ की मधुबन कॉलोनी में चार साल पहले बिछाई गई कनेक्शन लाइन में आज तक पानी नहीं आया है।
ग्लेशियरों से निकलने वाली नदियों के अलावा उत्तराखंड की अन्य नदियों में पानी का फ्लो काफी कम हो गया है। राज्य सरकार ने ऐसी 10 नदियों की पहचान की है, जिनके बारे में उनका मानना है कि उन्हें फिर से जिन्दा या पुनर्जीवित किया जा सकता है।