दरअसल, इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा था कि राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम यानी आईईईपीए के तहत व्यापक और सामान्य आयात शुल्क नहीं लगा सकते। अदालत ने माना कि यह कानून राष्ट्रीय आपात स्थिति में कुछ आर्थिक लेनदेन को नियंत्रित करने की अनुमति देता है, लेकिन बड़े पैमाने पर टैरिफ लागू करने का अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा शुल्क और व्यापार कर तय करने का प्राथमिक अधिकार कांग्रेस के पास है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते उस टैरिफ ढांचे को अमान्य कर दिया गया, जिसे आपातकालीन कानून के आधार पर लागू किया गया था। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि अन्य वैधानिक प्रावधानों के तहत व्यापार संबंधी कदम उठाने पर रोक नहीं है।
कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने पहले 10 प्रतिशत का अस्थायी वैश्विक टैरिफ लागू करने की बात कही थी। लेकिन अब अपने ताजा बयान में उन्होंने इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय कई महीनों से चल रहे विचार विमर्श और कानूनी समीक्षा के बाद लिया गया है।
इस फैसले का वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर पड़ सकता है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और उसके आयात शुल्क में वृद्धि से विभिन्न देशों के निर्यात पर प्रभाव पड़ने की संभावना है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किन देशों पर कितनी नई दरें लागू की जाती हैं और वैश्विक बाजार इस कदम पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।