facebookmetapixel
Advertisement
डेटा सेंटर, क्लाउड और फाइनेंशियल सर्विसेज होंगे Airtel के अगले ग्रोथ इंजन, 10 साल में ₹3.3 लाख करोड़ का निवेशUpcoming NFO: पैसा रखिए तैयार! अगले हफ्ते खुलेंगे 4 नए फंड, जानें किस स्कीम में क्या है खास?SIF बना रॉकेट: जून में निवेश 171% उछला, हाइब्रिड स्ट्रैटेजीज की AUM में 72% हिस्सेदारीUS-Iran तनाव व कच्चे तेल की कीमतों से तय होगी इस हफ्ते बाजार की चाल, निवेशक इन ट्रिगर्स पर रखें नजरUP के 3 प्रोडक्ट्स को मिला नया GI टैग, मथुरा की कंठी माला और अलीगढ़ के मेटल स्टैच्यू शामिलनई ग्रामीण रोजगार नीति ‘वीबी-जी राम जी’ से बढ़ी राज्यों की चिंता, संकट के समय वित्तीय मदद में आ सकती है कमीMCap: बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच HDFC Bank व Airtel की चमकी किस्मत, हिंदुस्तान यूनिलीवर को झटकाEPFO का कंपनियों को बड़ा मौका, बिना सरकारी मंजूरी वाले PF ट्रस्ट को वैलिड करने के लिए आई नई योजनाकतर को दुनिया का सबसे अमीर देश बनाने वाले शेख हमद बिन खलीफा का निधन, तख्तापलट कर संभाली थी सत्ताविदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार में लौटा भरोसा, जुलाई में अब तक खरीदे ₹15,157 करोड़ के स्टॉक्स

रेमडेसिविर के कंबिनेशन की तैयारी

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 7:53 PM IST

भारत में रेमडेसिविर को वाणिज्यिक तौर पर उतारने के लिए भले ही अभी इंतजार किया जा रहा हो लेकिन अमेरिका की प्रमुख दवा कंपनी गिलियड साइंसेज रेमडेसिविर में अन्य दवाओं को मिलाने पर कर रही सक्रियता से काम कर रही है। कंपनी रेमडेसिविर में गठिया की दवा बैरिसिटिनिब और टोसिलिजुमैब को मिलाकर नई दवा तैयार करने के लिए अध्ययन कर रही है। टोसिलिजुमैब कॉम्बिेनेशन के साथ उपचार के अध्ययन के लिए मरीजों की भर्ती इस महीने शुरू हो जाएगी।
इस बीच, कंपनी ने कहा है कि उसने भारत में उन स्वैच्छिक लाइसेंसधारियों की मदद के उद्देश्य से रेमडेसिविर के लिए न्यू ड्रग ऐप्लिकेशन (एनडीए) के लिए आवेदन किया है जिनके साथ गिलियड ने हाल में स्वैच्छिक लाइसेंस समझौता किया था ताकि इस दवा की आपूर्ति को बढ़ाया जा सके। कंपनी ने भारतीय बाजार में इस दवा को उतारने की समय-सीमा के बारे में टिप्पणी करने से इनकार किया। गिलियड के प्रवक्ता ने कहा, ‘भारत में रोगियों के लिए रेमडेसिविर को उपलब्ध कराने की समय-सीमा लाइसेंस पर निर्भर करेगी और उस प्रक्रिया पर गिलियड का कोई नियंत्रण नहीं है। हमारे व्यक्तिगत लाइसेंसधारकों ने भी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के पास आवेदन किया है ताकि स्थानीय क्लीनिकल परीक्षण संबंधी जरूरतों में छूट देते हुए रेमडेसिविर के उत्पादन और बिक्री की अनुमति दी जा सके।’
भारत में रेमडेसिविर के लाइसेंसधारियों में सिप्ला लिमिटेड, हेटरो लैब्स लिमिटेड, जुबिलैंट लाइफसाइंसेज और माइलन शामिल हैं। ये कंपनियां अभी भी रेमडेसिविर के विपणन की अनुमति मिलने का इंतजार कर रही हैं।
कंपनी सूत्रों ने बताया कि वे इस दवा के साथ तैयार हैं और फिलहाल भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) से मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। वे औषधि महानियंत्रण से उत्पाद लाइसेंस हासिल किए बिना उसका वाणिज्यिक उत्पादन शुरू नहीं कर सकती हैं।
इस बीच, कोविड-19 संक्रमण से प्रभावित महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ी तो वे बांग्लादेश जैसे अन्य देशों से इस दवा की सोर्सिंग करने पर विचार कर सकते हैं। इसकी लागत 10,000 शीशियों के लिए 12 करोड़ रुपये हो सकती है। विश्व व्यापार संगठन के प्रावधानों के तहत बांग्लादेश जैसे कम विकसित देश बिना लाइसेंस के पेटेंट वाली दवाओं के जेनेरिक संस्करण का उत्पादन कर सकते हैं।
बाजार में भले ही रोगियों को इस दवा का इंतजार है लेकिन इसे बनाने वाली कंपनी ने अन्य दवाओं के साथ मिलाकर इसके संभावित कंबिनेशन तैयार करने पर काम शुरू कर दिया है। इसके परिणाम जल्द सामने आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह काफी जरूरी है क्योंकि कोविड-19 वायरस तेजी से म्यूटेट यानी बदलाव कर रहा है।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में कार्यरत एक वैज्ञानिक ने कहा कि यह वायरस काफी तेजी से बदलाव कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘रोगियों पर हम जिन दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं वे मुख्य तौर पर वायरस को मानव कोशिका के अंदर अपनी प्रतिकृति बनाने से रोकने के लिए है। लेकिन यह वायरस तेजी से बदलाव कर रहा है और इसलिए दवा प्रभावी नहीं हो पाती है। ऐसे में हमें नई कंबिनेशन दवा पर काम करने की जरूरत है।’

Advertisement
First Published - June 10, 2020 | 11:42 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement