बच्चों के टीके को चरणबद्घ मंजूरी!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 12:08 AM IST

कोवैक्सीन को दो साल से कम उम्र के बच्चों में इस्तेमाल की मंजूरी मिलने में कुछ वक्त लग सकता है क्योंकि भारत में बच्चों के लिए यह टीका चरणबद्घ तरीके से लाए जाने के आसार हैं। सूत्रों ने बताया कि भारतीय दवा नियामक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों की सावधानी से जांच कर रहा है और कई पहलुओं का आकलन कर रहा है।
एक सूत्र ने कहा, ‘केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा कई कारकों पर विचार किया जा रहा है, जैसे युवाओं (18 वर्ष या उससे अधिक उम्र) पर टीके का कैसा प्रभााव तथा प्रदर्शन है। इसके अलावा टीके की उपलब्धता भी एक मसला है, जिसका आकलन किया जा रहा है।’ भारत बायोटेक अपने निष्क्रिय वायरस टीके की आपूर्ति बढ़ाने में जूझ रही है और अब तक देश में हुए कुल टीकाकरण में इसका योगदान केवल 11-12 प्रतिशत है।
2 से 17 वर्ष उम्र के बच्चों और किशोरों को कोवैक्सीन लगाने की इजाजत दी गई तो इस टीके की मांग में अचानक वृद्घि हो सकती है, जिससे बुजुर्गों और कमजोर लोगों के लिए टीके की उपलब्धता का संकट पैदा हो सकता है। सीरो-सर्वेक्षण के अनुसार भारत में लगभग 40 करोड़ बच्चों में से करीब 60 प्रतिशत यानी करीब 24 करोड़ में पहले ही एंटीबॉडी तैयार हो चुके हैं। सूत्र ने कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दुनिया भर में यह पहला कोविड-19 टीका होगा। सूत्र ने कहा, ‘इसलिए इस तरह की मंजूरी मिलने से पहले आंकड़ों की सावधानीपूर्वक समीक्षा आवश्यक है।’
मंजूरी मिलने के बाद भी बच्चों में इसकी शुरुआत चरणबद्ध तरीके से होने के आसार हैं। यानी 2 से 17 साल उम्र के बच्चों तथा किशोरों को शायद एक साथ टीका लगाना शुरू नहीं किया जाएगा। एक सूत्र ने कहा, ‘वयस्कों के मामले में भी कुछ इसी तरह के कदम अपनाए गए थे। हो सकता है कि पहले चरण में 12 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू किया जाए। कमजोर बच्चों या जिन बच्चों को दूसरी बीमारी है उनके लिए किसी भी उम्र वर्ग में होने के बावजूद प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’ स्वास्थ्य मंत्रालय से स्वतंत्र रूप से इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकी है।
वयस्क टीकाकरण के मामले में भारत ने स्वास्थ्य देखभाल और आवश्यक सेवाओं के कर्मियों को प्राथमिकता दी थी और फिर बुजुर्गों के साथ टीकाकरण की शुरुआत की। इसके बाद गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को टीका दिया जाने लगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी लगता है कि यह तरीका जरूरी है।
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ  इंडिया के अध्यक्ष के श्रीनाथ रेड्डी ने कहा, ‘हमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को पर्याप्त टीका लगाए जाने के बाद ही दूसरे आयु वर्ग के लिए टीके की शुरुआत करनी होगी। इसके बाद हम 12-18 आयु वर्ग और उसके बाद 5-11 आयु वर्ग समूह में जाते हैं। 2-5 आयु समूह हमारी तत्काल प्राथमिकता में नहीं है, जब तक कि हमारे पास टीके और टीका देने वालों की तादाद अधिक न हो जाए।’
विशेषज्ञों ने महसूस किया कि सभी आयु समूहों के लिए एक साथ टीकाकरण की शुरुआत नहीं हो सकती है। 12 अक्टूबर को कोवैक्सीन को विषय विशेषज्ञ समिति ने हरी झंडी दे दी, जो सीडीएससीओ को कोविड-19 टीकों और दवाओं से संबंधित मामलों पर सलाह दे रही है। आम तौर पर भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने पिछले कोविड-19 टीके की मंजूरी के मामले में एसईसी की सिफारिशों पर तुरंत कार्रवाई की है। बच्चों में कोवैक्सीन के इस्तेमाल के लिए मामले की समीक्षा में वक्त लग रहा है। एसईसी की सिफारिश के साथ कुछ और बातें भी जुड़ी हुई हैं। भारत बायोटेक को सुरक्षा डेटा जमा करने के लिए कहा गया है जिसमें टीकाकरण (एईएफ आई) के बाद प्रतिकूल घटनाओं और विशेष तौर पर गौर करने वाली प्रतिकूल घटना (एईएसआई) के पहले दो महीनों के लिए हर 15 दिनों में और उसके बाद का मासिक डेटा शामिल है। कंपनी को नए औषधि एवं क्लिनिकल परीक्षण नियम, 2019 के अनुसार जोखिम प्रबंधन योजना पेश करनी चाहिए।
एसईसी ने भारत बायोटेक को निष्क्रिय कोरोनावायरस टीके के स्वीकृत क्लिनिकल परीक्षण नियमों के अनुसार अध्ययन जारी रखने के लिए कहा है। कंपनी को अद्यतन नुस्खे, उत्पाद विशेषताओं के ब्योरे को पैकेज में शामिल (एसएमपीसी) करने के साथ ही एक तथ्यपत्र देना चाहिए।

First Published : October 19, 2021 | 10:59 PM IST