रेस्तरांओं और कैब सेवा प्रदाताओं को फटकार लगाने के बाद उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय क्रिप्टोकरेंसी (आभासी मुद्राओं) पर प्रश्नोत्तरी (एफएक्यू) तैयार करने के लिए समिति गठित करने की योजना बना रहा है। मंत्रालय जल्द ही शिक्षा-तकनीक कंपनियों जैसे बैजूस और अनएकैडमी के साथ भी बैठक करेगा। इन कंपनियों के खिलाफ शिकायतें आई हैं कि ये स्कूलों एवं बच्चों पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।
इस बारे में उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘क्रिप्टोकरेंसी के बारे में यह कहा जा रहा है कि इसका विज्ञापन दिया जा सकता है। इस वजह से आभासी मुद्राओं के मामले में एक प्रश्नोत्तरी उपभोक्ताओं को सही समझ विकसित करने में मदद करेगा। इनमें निवेश करने से पहले लोग अपनी पूरी समझदारी दिखा पाएंगे।’
शिक्षा-तकनीक कंपनियों पर सिंह ने कहा कि उन्होंने अन्य संबंधित पक्षों के साथ ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा दे रही कंपनियों के साथ एक बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा कि इस बैठक में एक ऐसा ढांचा तैयार हो सकता है जिसमें बच्चों को अनावश्यक दबाव झेलने से बचाया जा सके।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार इन कंपनियों के विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, सिंह ने कहा कि हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही एक ठोस कदम उठाया जाएगा। बैजूस के एक नए विज्ञापन ‘टू टीचर एडवांटेज’ से बच्चों पर अधिक दबाव आने जैसी शिकायतें आई हैं।
ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर फर्जी समीक्षा पर लगाम कसने के बारे में सिंह ने कहा कि एक समिति का गठन किया गया है जो इस मामले की तह तक जाएगी और उचित उपाय करेगी। इस समिति में ई-कॉमर्स कंपनियों जैसे एमेजॉन, रिलायंस, उपभोक्ता संगठन और विधि कंपनियों के प्रतिनिधि होंगे। सचिव ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अगले 60 दिनों के भीतर फर्जी समीक्षा पर अंकुश लगाने वाले दिशानिर्देश तैयार हो जाएंगे।’ कुछ दिनों पहले सिंह ने सेवा शुल्क के मामले में रेस्तरांओं और होटल व्यवसाय के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। अनुचित कारोबार व्यवहार की शक्तियों पर कैब सेवा प्रदाताओं कंपनियों के लोगों के साथ भी उन्होंने बैठक की थी।