सर्वोच्च न्यायालय अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (फीफा) द्वारा अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को निलंबित किए जाने के मामले पर बुधवार को सुनवाई करेगा। निलंबन की इस कार्रवाई से भारत में अंडर-17 वीमन वर्ल्ड कप अक्टूबर में आयोजित किए जाने की संभावना खत्म हो गई है।
सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना के पीठ के समक्ष एआईएफएफ का मामला रखा। उन्होंने कहा, ‘एआईएफएफ से संबंधित एक मामला कल आएगा। इस मामले में बीते दिन कुछ घटनाक्रम हुआ था। इस मामले को हटाया नहीं जा सकता है।’
उन्होंने कहा कि फीफा ने अपने बयान में निलंबन की कार्रवाई का कारण ‘तीसरे पक्ष के अनुचित प्रभाव’ का हवाला दिया था।
फीफा के मंगलवार को जारी बयान के अनुसार ‘एआईएफएफ की कार्यकारी समिति की शक्तियों को निरस्त कर प्रशासकों की समिति का गठन करने पर निलंबन को वापस लिया जाएगा और एआईएफएफ के प्रशासकों का एआईएफएफ के रोजमर्रा के मामलों पर पूरा नियंत्रण होगा।’
शीर्ष अदालत ने इस साल 18 मई को पारित आदेश में प्रशासकों की एक समिति (सीओए) गठित की थी। पता चला था कि एआईएफएफ की कार्यकारी समिति अपने चार साल के कार्यकाल के बाद भी जारी रही थी जो नियमों के अनुरूप नहीं था। न्यायालय ने एआईएफएफ के पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और उनकी कार्यकारी समिति को भी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया था। एआईएफएफ के संविधान का मसला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित होने के कारण इसके चुनाव नहीं हो पाए थे।
प्रशासकों की समिति ने 10 अगस्त को पटेल और राज्य फुटबॉल संघ के उनके संघों के पदाधिकारियों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना का मामला दायर किया था। इस याचिका में कहा गया था कि पटेल और पदाधिकारी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रशासकों की समिति से निगरानी के उद्देश्य को विफल करने का प्रयास कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त को खेल मंत्रालय के इस आग्रह को स्वीकृति दे दी थी कि खेल मंत्रालय प्रशासकों की समिति और फीफा के साथ बैठक कर सकता है।
न्यायालय ने मंशा जाहिर करते हुए कहा था कि भारत वर्ल्ड कप का आयोजन करे। जस्टिस चंद्रचूड़ ने एआईएफएफ, राज्य संघों, मंत्रालयों और अन्य संघों से कहा था ‘वे इस मुद्दे को आपस में सुलझाना चाहते हैं तो हमें कोई कठिनाई नहीं है। हम चाहते हैं कि यहां पर वर्ल्ड कप आयोजित हो। ‘
अदालत ने एआईएफएफ चुनावों के संबंध में प्रशासकों की समिति के इस प्रस्ताव पर सहमति दी थी कि 36 नामचीन फुटबॉल खिलाड़ी निर्वाचक मंडल का हिस्सा हों और उन्हें वोट देने का अधिकार हो।