सरकार किसानों से बातचीत के लिए तैयार

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 10:25 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि सरकार किसानों सहित उन लोगों के साथ भी बातचीत करने को तैयार है जो अलग विचारधारा के चलते सरकार के खिलाफ हैं लेकिन यह बातचीत तर्कसंगत, तथ्यों और मुद्दों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों और सरकार के बीच जारी गतिरोध के लिए इसकी आड़ में राजनीतिक हित साधने वाले लोगों को दोषी ठहराया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की नई किस्त जारी करते हुए मोदी ने कहा कि जब किसान आंदोलन की शुरुआत हुई थी तब नए कानूनों को लेकर उनकी न्यूनतम समर्थन मूल्य सहित कुछ वाजिब चिंताएं थीं लेकिन बाद में इसमें राजनीतिक लोग आ गए और हिंसा के आरोपियों की रिहाई और राजमार्गों को टोल मुक्त बनाने जैसे मुद्दे इसमें हावी होने लगे हैं। प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन तरीके से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत नौ करोड़ से अधिक किसानों के लिए 18,000 करोड़ रुपये की राशि जारी की। इसके जरिये किसानों के बैंक खाते में 2,000 रुपये सीधे हस्तांतरित किए गए।
 
कृषि कानूनों को बचाव करते हुए उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में देश के किसानों ने इन तीन कृषि कानूनों का स्वागत किया है और वे इसके फायदे भी उठा रहे हैं।  प्रधानमंत्री के आरोपों पर आंदोलनकारी किसान संगठनों ने कहा कि यह किसानों को बांटने और भ्रमित का प्रयास है। उन्होंने कहा कि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी चाहते हैं। राजनीतिक दलों पर प्रधानमंत्री के आरोपों पर किसान नेता अभिमन्यु कोहर ने कहा कि किसान संगठन किसी भी राजनीतिक दल को अपने मंच का इस्तेमाल करनी की अनुमति नहीं दी है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को मुद्दे से भटका रही है।
 
कोहर संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य भी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने दावा किया है कि तीनों कृषि कानूनों से किसानों को लाभ हो रहा है लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि नए कानून किसानों के लिए किस तरह लाभकारी है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने कहा कि केंद्र कई पत्रों और व्याख्या से भ्रमित करने का प्रयास कर रही है लेकिन कृषि कानूनों तथा बिजली विधेयक, 2020 को रद्द करने के लिए तैयार नहीं है। किसानों की स्पष्टï मांग है कि कानूनों को रद्द किया जाए न कि इसमें संशोधन हो। उन्होंने कहा कि किसानों से बातचीत से कभी इनकार नहीं किया है लेकिन यह बातचीत कानूनों को रद्द करने पर होना चाहिए।
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की जनता ने जिन राजनीतिक दलों को नकार दिया है वे अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए किसानों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं सभी किसानों का आभार व्यक्त करता हूं और उन्हें भरोसा दिलाना चाहता हूं कि आप के विश्वास पर हम कोई आंच नहीं आने देंगे।’  मोदी ने कहा कि कुछ दल कृषि कानूनों का विरोध कर अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। कुछ लोग यह भ्रम और झूठ फैला रहे हैं कि यदि किसान अनुबंध खेती करेंगे तो उनकी जमीन चली जाएगी।

First Published : December 25, 2020 | 10:00 PM IST