बिजली मंत्रालय आगामी वित्त वर्ष में 1,500 करोड़ रुपये आवंटन के बाद अहम बिजली व अक्षय ऊर्जा उपकरणों की घरेलू विनिर्माण योजना पेश करेगा। बजट में पेश ‘आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत विनिर्माण क्षेत्र’ नाम की इस योजना के तहत एक साल में देश में 3 विनिर्माण क्षेत्र स्थापित किए जाएंगे।
ये क्षेत्र तीन श्रेणियों- तटीय, पूरी तरह जमीन से घिरे और पहाड़ी राज्य में बंटे होंगे। इस योजना के तहत राज्यों से क्षेत्र स्थापित करने के लिए आवेदन करने को कहा गया है। तीन चुनिंदा क्षेत्रों को विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रत्येक को 500 करोड़ रुपये मिलेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि एक समिति यह चुनाव करेगी कि किस राज्य ने बेहतर सुविधाओं की पेशकश की है। अधिकारी ने कहा, ‘क्षेत्र के चयन का दायरा भूमि, सस्ती बुनियादी ढांचा सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, जल शोधन आदि के आधार पर होरगा। केंद्र सरकार इन क्षेत्रों में साझा बुनियादी ढांचा और परीक्षण की सुविधा मुहैया कराएगी।’
बिजली उपकरणों के लिए उपकरण परीक्षण सुविधा की स्थापना केंद्रीय बिजली शोध संस्थान (सीपीआरआई) और अक्षय ऊर्जा के उपकरणों के लिए राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) और राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (एनआईडब्ल्यूई) परीक्षण केंद्र बनाएंगे।
अगर चुने गए राज्य सस्ती बिजली देने में सक्षम नहीं होते हैं तो ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार ओपन एक्सेस बिजली आपूर्ति करने की योजना बना रही है।
अधिकारी ने कहा, ‘राज्य एसपीवी का गठन करेंगे, जिसे विनिर्माण केंद्र स्थापित करने के वक्त निजी कंपनियों को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। ध्यान उन उपकरणों पर रहेगा, जिनका विनिर्माण भारत में किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उनका आयात हो रहा है।’
केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने सितंबर 2020 में 80 सामानों की सूची जारी की थी, जिनका पर्याप्त क्षमता के बावजूद आयात हो रहा है। एक अधिकारी ने कहा, ‘हम नई पीढ़ी के उपकरणों के विनिर्माण की भी योजना बना रहे हैं, जो अभी भारत के बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।’ इंडियन इलेक्ट्रिकल ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईईईएमए) ने कहा कि यह योजना बहुत सही वक्त पर आ रही है, जब हमने आयात को सीमित कर दिया है। बिजली मंत्रालय ने जुलाई 2020 साइबर हमले और आंतरिक सुरक्षा का हवाला देते हुए आयात प्रतिबंधित किया था।