भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने पाया है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में कुछ ऐसी खामी है जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी होती है। सीएजी ने जीएसटी की जटिल अनुपालन प्रणाली को इसके लिए दोषी ठहराया है।
सीएजी ने आज संसद को अपनी रिपोर्ट सौंपी है जिसमें उसने कहा है, ‘इनवॉइस मिलान के जरिये मूल रूप से परिकल्पित प्रणाली से मान्य आईटीसी को लागू नहीं किया गया। रिटर्न तंत्र की जटिलता और तकनीकी दोषों के कारण महत्त्वपूर्ण जीएसटी रिटर्नों को वापस लेना पड़ा जिससे व्यवस्था में आईटीसी की धोखाधड़ी की गुंजाइश बन गई।’
मौजूदा ऑडिट के दौरान सीएजी ने पाया कि सरलीकृत रिटर्न फॉर्म को लागू करने में लगातार हो रही देरी और निर्णय लेने में देरी के कारण इनवॉइस मिलान के माध्यम से मूल रूप से परिकल्पित प्रणाली से सत्यापित आईटीसी के प्रवाह को अब तक लागू नहीं किया गया है और एक गैर-हस्तक्षेप वाली ई-कर प्रणाली को अब तक लागू नहीं किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘जीएसटी रिटर्न प्रणाली पर अभी भी काम चल रहा है जबकि जीएसटी को लागू हुए तीन वर्ष से अधिक समय हो चुका है। स्थायी और सरल रिटर्न तंत्र के अभाव में जीएसटी लागू करने के प्रमुख उद्देश्यों में से एक सरलीकृत कर अनुपालन प्रणाली अब तक साकार नहीं हो पाया है।’ सीएजी ने सिफारिश की है कि सरलीकृत रिटर्न फॉर्म को लाने के लिए एक निश्चित समयावधि तय की जा सकती है।