इस साल बजट में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत किफायती आवास के लिए 48,000 करोड़ रुपये आवंटित करेगी। यह आवंटन योजना के शहरी और ग्रामीण दोनों हिस्सों के लिए था। बजट के कुछ दिन बाद सरकार ने ग्रामीण योजना के तहत मकानों के निर्माण की समय-सीमा दो साल और बढ़ा दी क्योंकि यह लक्ष्य से काफी पीछे था।
बिजऩेस स्टैंडर्ड के विश्लेषण से पता चलता है कि सरकार को पीएमएवाई (शहरी क्षेत्र) के लिए भी ऐसा करना पड़ सकता है क्योंकि 17 मई तक केवल 48.7 प्रतिशत ही मकान बनकर तैयार हो पाए थे। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च, 2022 तक 1.21 करोड़ मकान बनाने का था। हालांकि, जून 2015 में योजना की घोषणा के बाद से केवल 59 लाख मकानों का निर्माण ही संभव हो सका।
पीएमएवाई पोर्टल के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एक साल में बनकर तैयार होने वाले मकानों की संख्या पिछले सात सालों में एक बार भी 20 लाख के आंकड़े को पार नहीं कर पाई है। वर्ष 2018-19 में ही सरकार सबसे अधिक 18 लाख मकानों का निर्माण करने में सक्षम हो पाई थी। वर्ष 2019-20 में करीब 840,645 मकानों का निर्माण कार्य पूरा हुआ था और बाद के दो वर्षों में 14.6 लाख और 12.1 लाख मकानों का निर्माण किया गया था। इन आंकड़ों की गणना से पता चलता है कि इस रफ्तार से, सरकार को अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए पांच साल का वक्त और लगेगा। इसमें सरकार ने जिन अतिरिक्त आवासों को मंजूरी दी है उनका हिसाब नहीं है। सरकार ने शुरू में 1.1 करोड़ मकानों के निर्माण को मंजूरी दी थी। बाद में यह संख्या बढ़ाकर 1.2 करोड़ से कुछ अधिक कर दी गई।
विश्लेषण से पता चलता है कि अधिकांश पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा जहां मकानों के पूरी तरह बनकर तैयार होने की दर 30 प्रतिशत से कम थी। इस लिहाज से आंध्र प्रदेश, हरियाणा, बिहार और कर्नाटक भी राष्ट्रीय औसत से नीचे रहे हैं। 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से, 18 राज्यों में मकान बनकर तैयार होने की दर राष्ट्रीय औसत से कम थी। आंध्र प्रदेश में अब तक स्वीकृत मकानों में से केवल 24 प्रतिशत ही तैयार किए जा सके हैं।
वहीं हरियाणा में 31.4 प्रतिशत और बिहार में 34.2 प्रतिशत मकान ही बनकर तैयार हुए हैं। इस बीच, दिल्ली और चंडीगढ़ ने स्वीकृत संख्या से अधिक मकान बनाकर तैयार कर दिए हैं। गोवा में मकान बनाकर तैयार करने की दर 92 प्रतिशत थी जबकि उत्तर प्रदेश सहित 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 60 प्रतिशत से अधिक मकान बनाकर लाभार्थियों को दिए हैं। सरकार के डैशबोर्ड के अनुसार, इस योजना के लिए अब तक 2 लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित राशि में से 1.18 लाख करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। जैसे-जैसे परियोजनाओं में देरी होगी निर्माण लागत में भी वृद्धि होने की संभावना है।